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जिसने BJP को हराया, कांग्रेस ने उसे ठेंगा दिखाया; कर्नाटक में दिक्कत न कर दें दिग्गज सावदी

75 हजार से ज्यादा मतों से जीतने वाले सावदी की भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत में बड़ी भूमिका मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि सावदी के जरिए ही कांग्रेस ने 30-35 सीटों पर जीत सुनिश्चित की है।

जिसने BJP को हराया, कांग्रेस ने उसे ठेंगा दिखाया; कर्नाटक में दिक्कत न कर दें दिग्गज सावदी
Nisarg Dixitलाइव हिन्दुस्तान,बेंगलुरुMon, 29 May 2023 01:12 PM
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं, कांग्रेस जीत चुकी है, सरकार भी बन चुकी है, लेकिन तकरार पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि मंत्रालयों के बंटवारे के बाद अब असंतोष के सुर उठ सकते हैं। इनमें एक नाम वोटिंग से कुछ हफ्ते पहले ही भारतीय जनता पार्टी से कांग्रेस में गए लक्ष्मण सावदी का भी है। राज्य के उपमुख्यमंत्री रह चुके सावदी का नाम नए मंत्रियों की सूची में कहीं नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने इसपर खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन उनके समर्थक कांग्रेस को निशाने पर ले रहे हैं।

सावदी ने भाजपा को हराने में निभाई बड़ी भूमिका
बेलगावी जिले के अथानी से 75 हजार से ज्यादा मतों से जीतने वाले सावदी की भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत में बड़ी भूमिका मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि सावदी के जरिए ही कांग्रेस ने 30-35 सीटों पर जीत सुनिश्चित की है। एक और बड़े नेता जगदीश शेट्टार भले ही अपनी सीट गंवा चुके हों, लेकिन उन्होंने लिंगायत वोट कांग्रेस की ओर मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है।

एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि दल बदल करने वाले नेताओं को शामिल करने को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने तनाव भी हुआ था। अरसीकेरे से जीतने वाले केएम शिवलिंगगौड़ा जेडीएस में थे, लेकिन उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुना लड़ा। वह भी मंत्री बनना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने स्वीकार नहीं किया और ऐसे में संतुलन बनाने में सावदी को बाहर कर दिया गया।

लोकसभा के लिए हो सकता है झटका
भारत में 2024 के मध्य में ही लोकसभा चुनाव होने हैं। कर्नाटक में कुल 28 सीटें हैं, जिनमें 14 पर लिंगायत मतदाता मजबूत स्थिति में हैं। सावदी के समर्थकों का मानना है कि ये वोट कांग्रेस के पक्ष में लाने में वह मददगार हो सकते हैं। इसके अलावा यह कांग्रेस के लिए भी बुरा संदेश देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि सावदी पार्टी के लिए अहम होते और मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र में पार्टी की मजबूती में भी मददगार होते।

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