न्यायिक कार्यों से विरत न रहने का नहीं दिया जाएगा शपथ-पत्र
मेरठ। अधिवक्ताओं की संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट के आदेश को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताकर शपथ पत्र दाखिल न करने का निर्णय लिया। उन्होंने वर्चुअल वार्ता कर सभी बार एसोसिएशन के चंदा के खिलाफ हड़ताल जारी रखने का निर्णय किया है। इससे न्यायालयीन कार्यों में बाधा उत्पन्न होगी।

मेरठ। मेरठ समेत 22 जिलों के अधिवक्ताओं की संघर्ष समिति ने रजिस्ट्रार जनरल इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रदेश के सभी बार एसोसिएशन द्वारा न्यायिक कार्य से विरत न रहने और हड़ताल न करने संबंधी आदेश को अधिवक्ताओं के मौलिक अधिकारों को कुचलने वाला बताते हुए शपथ-पत्र दाखिल न किये जाने का निर्णय लिया गया। शनिवार को हाईकोर्ट के आदेश के चलते बदायूं, मुजफ्फरनगर, नोएडा, गाजियाबाद सहारनपुर, बुलन्दशहर, मुरादाबाद, अमरोहा, कैराना, बागपत, शामली, खेकडा, अलीगढ़, मेरठ, मवाना, रामपुर, जिलों और तहसीलों के बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वर्चुअल वार्ता करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। अन्य तमाम जिलों की बार से फोन पर वार्तालाप की गयी। सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए रजिस्ट्रार जनरल के उस आदेश को, जिसमें सभी बार के पदाधिकारियों को वचनबद्धता दाखिल करते हुए हड़ताल और न्यायिक कार्यो से विरत न रहने का निर्देश दिया गया था, की घोर निन्दा की। इसे अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता पर कुठाराघात और उनके मौलिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास बताया गया। सभी ने इस सम्बन्ध में कोई भी शपथ पत्र दाखिल न किये जाने का निर्णय लिया। आगामी कार्यकारिणी के लिये सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं का एक अधिवक्ता सम्मान महासम्मेलन आयोजित किये जाने का निर्णय लिया गया। इस मौके पर संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा, संयोजक परवेज आलम, देवपाल सिंह, प्रमोद त्यागी, मनोज भाटी, ब्रहमदेव त्यागी, राहुल त्यागी, रविन्द्र शर्मा, सुगन्ध जैन, आनन्द मोहन गुप्ता, कपिल कुमार चिकारा, ईशपाल सिंह, सुभाष सिंह तोमर, सोनू शर्मा, हरिओम शर्मा, अनिल कुमार शर्मा, रणधीर सिंह यादव, सतेन्द्र शर्मा, प्रशान्त गुप्ता, दीपक कुमार विश्नोई, अजीत सिंह, प्रदीप कुमार, संजीव यादव, मनोज कुमार कुराली अधिवक्ता पदाधिकारियों ने भाग लिया।
अनिश्चितकालीन रजिस्ट्री कार्यालय में कार्य न किये जाने का लिया गया निर्णय
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और बार एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार द्वारा ई-रजिस्ट्रीकरण व्यवस्था के तहत अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से दस्तावेजों को पंजीकृत कराये जाने के सरकार के आदेश को तानाशाही वाला निर्णय बताया गया। जिसके विरोध में पिछले 10 दिन से चली आ रही हड़ताल अधिवक्ताओं ने इस आदेश को वापस नहीं लिये जाने तक जारी रखने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक एसोसिएशन के प्रदेश संरक्षक संजय गुप्ता ने बताया कि इस सम्बन्ध में प्रदेश के तमाम बार एसोसिएशन से वर्चुअल वार्तालाप होने के बाद यह निर्णय लिया गया। लखनऊ में अधिकारियों ने बातचीत के दौरान आश्वासन तो दिया है कि नियम 6 में 7 के तहत दस्तावेज लेखकों को भी इसमें शामिल किया जाएगा, किंतु जब तक यह आदेश नहीं आता तब तक सर्वसम्मति से हड़ताल पर रहने का प्रस्ताव किया गया है। कोई अधिवक्ता निबंधन संबंधी कोई कार्य नहीं करेंगे।
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Rakesh Priyadarshiशॉर्ट बायो :
राकेश प्रियदर्शी पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में सेना और कैंट बोर्ड बीट को देख रहे हैं।
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राकेश प्रियदर्शी मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में पश्चिम उत्तर प्रदेश, मेरठ में सेना और कैंट बोर्ड टीम की लीड करते हैं। 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया में कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
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राकेश प्रियदर्शी ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2000 में हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख अखबार से की जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2007 से 2008 तक दैनिक जागरण में डिजिटल के साथ काम किया। 2008 से हिन्दुस्तान में शुरुआत की। यहां उन्होंने सेना, कैंट बोर्ड की खबरों की विशेष कवरेज की।
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विशेषज्ञता
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सेना और कैंट बोर्ड की गतिविधियों की एक्सप्लेनर रिपोर्टिंग।


