ई-रजिस्ट्री के निजीकरण के विरोध में वकीलों और कातिबों ने खोला मोर्चा
सासनी तहसील में प्रदर्शन करते हुए ई-रजिस्ट्री के निजीकरण के विरोध वकीलों और कातिबों नेई-रजिस्ट्री के निजीकरण के विरोध वकीलों और कातिबों नेई-रज

सासनी।तहसील परिसर में बुधवार को बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों ने ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया के निजीकरण के दूसरे दिन के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित अधिवक्ताओं और कातिब संघ ने संयुक्त रूप से उपजिलाधिकारी नीरज शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा और इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा 4 जून 2026 को जारी आदेश के तहत ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया का निजीकरण कर इसे निजी संस्थाओं को सौंपने का निर्णय जनविरोधी और लोकतंत्र के खिलाफ है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में रजिस्ट्री प्रक्रिया सरकारी तंत्र द्वारा सुचारू रूप से चल रही है, जिसे निजी हाथों में सौंपने से आम जनता को भारी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
बार एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि इस प्रक्रिया के निजीकरण से रजिस्ट्री प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाएगी, जिससे अधिवक्ताओं, कातिबों और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और बेरोजगारी भी बढ़ेगी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समय रहते ई-रजिस्ट्री के निजीकरण का आदेश वापस नहीं लिया गया, तो अधिवक्ता और कातिब वर्ग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।ज्ञापन देने वालों में महेंद्र पाल सिंह , प्रशांत , हर्षित लवानिया , कृष्ण सिंह , सुभाष सिंह, योगेश शर्मा, राजेश शर्मा, महेश गौतम, प्यारेलाल शर्मा, भरत सिंह बघेल, अरविंद गुप्ता, संदीप सिंह, राजवीर सिंह, गौरीशंकर, गीतम सिंह, सुनील पाठक, संतोष शर्मा एडवोकेट, राजकुमार, अजय सिंह, अनिल गुप्ता, ललित उपाध्याय, सुशील कुमार और अर्पित गौतम सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण,कातिब, स्टाम्प वेंडर और टाइपिस्ट मौजूद रहे।


