‘सोच विचार’ के 17वें काशी अंक का लोकार्पण मुंबई में हुआ
वाराणसी। काशी से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘सोच विचार’ का 17वां अंक मुम्बई के मीरारोड में लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. सूर्य बाला ने इसे हिन्दी संसार की अनमोल धरोहर बताया। कार्यक्रम में काशी की साहित्यिक परंपरा और पत्रिका के योगदान की सराहना की गई। संपादक नरेंद्रनाथ मिश्र ने सभी का आभार जताया।

वाराणसी। काशी से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘सोच विचार’ के 17वें काशी अंक का मुम्बई के मीरारोड स्थित विरुंगंला केंद्र के सभागार में लोकार्पण हुआ। इस मौके पर स्वर फाउंडेशन की ओर से आयोजित परिचर्चा की मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कथा लेखिका डॉ. सूर्य बाला थीं। उन्होंने कहा कि ‘सोच विचार’ का दिवंगत साहित्यकारों से संबंधित मौजूदा संस्मरण अंक हिन्दी संसार में अनमोल धरोहर की तरह है। देश में इस तरह का यह प्रथम प्रयास है। प्रो. हूबनाथ पांडेय ने काशी अंक के भाषागत सौंदर्य और विषयवार प्रस्तुत पठनीय सामग्री की व्याख्या की। रचनाकार रमन मिश्र और डॉ. अनिल गौड़ ने काशी की साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को रेखांकित करते हुए सोच विचार के योगदान को विस्तार देने वाला बताया।
कवि और पत्रकार राकेश शर्मा ने संस्मरण अंक को संग्रहणीय बताया। शैलेश कुमार सिंह ने काशी अंक को पठनीय कहा तो बोधिसत्व ने काशी के महात्म्य एवं परंपरा की अनूठी कड़ी से विभूषित किया। हिन्दुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सोचविचार का यह अंक भाव और विचार का सुन्दर समन्वय है। कवि धूमिल के पुत्र रत्नशंकर पांडेय ने पत्रिका के साहित्यिक योगदान की सराहना की।सोचविचार के संपादक नरेंद्रनाथ मिश्र का संस्था ने सारस्वत अभिनंदन किया। श्री मिश्र ने पत्रिका के मानक विधान की चर्चा की और स्नेह के लिए सभी आभार जताया। कार्यक्रम के अध्यक्ष शीतला प्रसाद दुबे ने मुम्बई में इस तरह के प्रेरक कार्यक्रमों से साहित्य उन्नयन की बात कही। स्वागत हृदयेश मयंक, संचालन हरिप्रसाद राय और आभार रमन मिश्र ने व्यक्त किया। इस अवसर पर मदनमोहन सिंह, ओमप्रकाश तिवारी, विक्रम प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।


