सर्वेश अस्थाना: जिनकी मुस्कान बनी पहचान, ‘शब्द सारथी’ में सजा जीवन-सफर
लखनऊ में सर्वेश अस्थाना की जीवनी 'शब्द सारथी: सर्वेश अस्थाना' का लोकार्पण डॉ. सुरभि सिंह द्वारा उनके जन्मदिन पर हुआ। समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. विद्याविंदु सिंह ने की। मुख्य अतिथि पवन सिंह चौहान सहित कई गण्यमान्य व्यक्तियों ने पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में सर्वेश के व्यक्तित्व और लेखन पर चर्चा हुई।

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग्यकार एवं ‘स्माइलमैन’ सर्वेश अस्थाना पर डॉ. सुरभि सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘शब्द सारथी: सर्वेश अस्थाना’ का लोकार्पण उनके जन्मदिन पर हिंदी संस्थान में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. विद्याविंदु सिंह ने की। मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान रहे। शिक्षाविद अनिल अग्रवाल, आईएएस डी.एन. लाल, डॉ. विष्णु सक्सेना और डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव ने भी पुस्तक का लोकार्पण किया। समारोह का शुभारंभ प्रो. नेहाश्री के संचालन और शीतल बाजपेयी की वाणी वंदना से हुआ। मुकुल महान ने सर्वेश अस्थाना से जुड़े रोचक संस्मरण सुनाकर माहौल को जीवंत किया। अनिल अग्रवाल ने उनके सरल व्यक्तित्व और अपने जीवन में उनके महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव ने पुस्तक की भाषा-शैली की सराहना करते हुए सर्वेश के व्यक्तित्व को जीवन की धूप-छांव के प्रतीकों से जोड़ा। डी.एन. लाल ने उनके गीत और गद्य लेखन पर आलोचनात्मक दृष्टि डाली। डॉ. विष्णु सक्सेना ने उनके मंचीय जीवन और आत्मिक व्यक्तित्व पर भावुक वक्तव्य दिया तथा काव्यपाठ किया।मनोरमा लाल ने पुस्तक की समीक्षा की। स्वयं सर्वेश अस्थाना ने भी पुस्तक और अपने जीवन पर विचार रखे। पवन सिंह चौहान ने कृति को सर्वेश का समग्र भाव-भंडार बताया। अध्यक्ष डॉ. विद्याबिंदु सिंह ने कहा कि सर्वेश अस्थाना मुस्कान का पर्याय हैं। विशेष संयोग रहा कि इसी दिन उनके पुत्र सर्वज्ञ और पुत्री काव्या का भी जन्मदिन था।


