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कराची में हुआ था जन्म, 1947 का वो धमाका जिसके बाद लालकृष्ण आडवाणी ने छोड़ दिया पाकिस्तान

आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था कि क्या आपके दिल में कराची के लिए विशेष लगाव है? इस पर उन्होंने कहा था कि बहुत ज्यादा।

कराची में हुआ था जन्म, 1947 का वो धमाका जिसके बाद लालकृष्ण आडवाणी ने छोड़ दिया पाकिस्तान
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 03 Feb 2024 02:17 PM
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भाजपा के सीनियर नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को खुद यह घोषणा की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में शामिल आडवाणी का भारत के विकास में महान योगदान है। उन्होंने अपने जीवन में जमीनी स्तर पर काम करने से शुरुआत कर हमारे उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की।' मोदी ने सबसे लंबे समय तक बीजेपी के अध्यक्ष रहे आडवाणी से बात की और उन्हें बधाई दी। इस मौके पर हम आपको बताते हैं कि कैसे पाकिस्तान के कराची में जन्मे आडवाणी भारत आए। आखिर 1947 में बम धमाके वाली वो कौन सी घटना थी जिसके बाद आडणावी ने पाकिस्तान छोड़ने का निश्चय कर लिया। 

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लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर, 1927 को पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। 1997 में एंड्रयू वाइटहेड को दिए इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या आपके दिल में कराची के लिए खास लगाव है? इस पर उन्होंने कहा था कि बहुत ज्यादा। आडवाडी ने कहा, 'मेरा जन्म कराची में हुआ। मैंने वहां रहकर स्कूल की पढ़ाई पूरी की। कुछ समय के लिए कॉलेज भी गया। जब मैंने कराची छोड़ा तब मेरी उम्र 19 साल थी।' उन्होंने बताया कि उस समय कराची की आबादी 3-4 लाख थी। उन्होंने कहा कि मेरे ज्यादातर दोस्त हिंदू थे, कुछ ईसाई, पारसी और यहूदी भी थे। उन्होंने सेंट पैट्रिक हाई स्कूल से पढ़ाई की जिसमें बहुत कम मुस्लिम पढ़ते थे।

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कैसे 1947 आते ही तेजी से बदलने लगे हालात 
भारत-पाकिस्तान बंटवारे को लेकर आडवाडी ने कई सारी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि 1947 आते ही चीजें तेजी से बदलने लगीं। इंटरव्यू में आडवाणी ने कहा, 'मैं उस समय तक आरएसएस से जुड़ गया था। तब वहां मुस्लिम लीग इतना मजबूत नहीं हुआ करती थी। दोनों देशों का बंटवारा जब शुरू हुआ तो हमने वहीं रहने का फैसला किया था क्योंकि कराची में पंजाब जैसे हालात नहीं थे। मगर, कुछ ही दिनों में स्थितियां तेजी से बदल गईं।' आडवाणी ने कहा कि कराची में सितंबर, 1947 में एक भीषण धमाका हुआ था। इसके बाद से ही वहां रहने वाली हिंदू आबादी का नजरिया बदल गया। 

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धमाके को लेकर RSS की साजिश का आरोप
इस ब्लास्ट को लेकर RSS के लोगों पर आरोप लगाए गए। 11 या 12 सितंबर के डॉन अखबार में धमाके को लेकर आरएसएस की साजिश का आरोप लगाया गया था। इसकी हेडलाइन ‘RSS Plot to Blow Up Pakistan Unearthed’ थी। उन्होंने कहा कि तब मैं 19 साल का था और उस उम्र में भी आरएसएस से जुड़े होने के कारण भयभीत नहीं हुआ। आखिर में हमने 12 सितंबर, 1947 को कराची छोड़ दिया। पहले वह अकेले ही गए। ऐसा इसलिए क्योंकि आरएसएस से जुड़े होने के चलते लोगों ने उन्हें जल्दी वहां से चले जाने की सलाह दी थी। इसके करीब एक महीने के बाद उनके परिवार वालों ने कराची छोड़ा। 

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