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6 अगस्त, 2020|12:24|IST

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LAC तनाव: भारत ने चीनी सेना से पूरे फिंगर इलाके को खाली करने के लिए कहा

pangong lake in ladakh near india china lac   ap file photo

भारत और चीन की सेनाओं के बीच लेफ्टनेंट जनरल स्तर की बातचीत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चुशूल में देर रात तक चली है। इस दौरान भारत की तरफ से फिंगर क्षेत्र को लेकर मजबूती से अपना पक्ष रखा गया है तथा चीनी सेना से फिंगर 8 तक के क्षेत्र को खाली कर अप्रैल की स्थिति बहाल करने को कहा गया है। भारतीय क्षेत्र चुशूल में दोनों देशों के शीर्ष सैन्य कमांडरों के बीच दोपहर साढ़े ग्यारह बजे बातचीत शुरू हुई जो 10 घंटे से भी अधिक समय तक चली।

सैन्य सूत्रों ने बातचीत को लेकर कोई आधिकार बयान मंगलवार (14 जुलाई) को जारी नहीं किया। संभावना है कि बुधवार (15 जुलाई) को इस पर बयान जारी हो सकता है। सूत्रों के अनुसार बातचीत के दौरान भारत की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने स्पष्ट कहा कि चीनी सेना फिंगर-8 इलाके से पीछे हटे। इसके साथ ही उनसे डेप्सांग इलाक में सैनिकों की तैनाती में कटौती करने को भी कहा गया है।

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दरअसल, चीनी सेना चार स्थानों से पीछे हटने के बावजूद फिंगर पांच से लेकर आठ तक अभी भी काबिज है। इस पर उसने कड़ा रुख अपनाया हुआ है। इसलिए इस चौथे दौर की बैठक को सबसे कठिन माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि बफर जोन से जुड़े मुद्दों और अब तक हुई प्रगति की भी बैठक में समीक्षा हुई है, लेकिन बैठक का कुल नतीजा क्या निकला, इस बारे में आधिकारिक घोषणा बुधवार को ही होने की संभावना है।

संघर्ष के स्थानों से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया के पहले चरण को लागू करने के बाद यह वार्ता हो रही है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने गोगरा, हॉट स्प्रिंग और गलवान घाटी से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है और भारत की मांग के अनुरूप पिछले एक हफ्ते में पैंगोंग सो इलाके में फिंगर फोर में अपनी मौजूदगी को काफी हद तक कम कर लिया है। परस्पर सहमति से लिए गए फैसले के अनुरूप दोनों पक्षों ने संघर्ष वाले ज्यादातर स्थानों में न्यूनतम तीन किलोमीटर का बफर जोन बनाया है।

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सैनिकों के पीछे हटने की औपचारिक प्रक्रिया छह जून को शुरू हुई थी जब इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इलाके में तनाव कम करने के तरीकों पर करीब दो घंटे तक फोन पर बातचीत की थी। दोनों देशों के बीच पहले ही लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की तीन चरण की वार्ता हो चुकी है और अंतिम वार्ता 30 जून को हुई थी जब दोनों पक्ष गतिरोध को समाप्त करने के लिए “शीघ्र, चरणबद्ध और कदम दर कदम” तरीके से तनाव कम करने को “प्राथमिकता” देने पर सहमत हुए थे।

सूत्रों ने बताया कि मंगलवार की बैठक में दोनों पक्ष अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में पूरी तरह से शांति स्थापित करने के लिए एक रूपरेखा को भी अंतिम रूप दे सकते हैं जहां दोनों देशों के सैनिकों के बीच आठ हफ्ते तक गतिरोध चला। लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर वार्ता का पहला दौर छह जून को हुआ था जिसमें दोनों पक्षों ने गतिरोध वाले क्षेत्रों से पीछे हटने के एक समझौते को अंतिम रूप दिया था।

हालांकि 15 जून को उस समय स्थिति बिगड़ गई जब गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंस झड़प हुई। तनाव उस समय बढ़ गया था जब गलवान घाटी में हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे। झड़प में चीन के सैनिक भी हताहत हुए थे, लेकिन इस संबंध में उसने अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है। एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन के हताहत सैनिकों की संख्या 35 है।

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  • Web Title:Ladakh LAC Tension India Ask China Leave Whole Finger Area