जगमोहन रौतेला को प्रथम 'कुंवर प्रसून स्मृति पर्यावरण एवं जनपक्षधर पत्रकारिता सम्मान
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में कुंवर प्रसून के पर्यावरणीय एवं सामाजिक मुद्दों पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला को कुंवर प्रसून स्मृति सम्मान दिया गया। शीशपाल गुसाईं की पुस्तक 'कलम का गांधी' का लोकार्पण भी हुआ। वक्ताओं ने कुंवर प्रसून के अनेक आंदोलनों में योगदान पर बात की।
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में बुधवार को चिपको आंदोलन के अग्रणी जननायक, प्रखर पत्रकार और पर्यावरण योद्धा कुंवर प्रसून के पर्यावरणीय एवं सामाजिक सरोकारों पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला को प्रथम कुंवर प्रसून स्मृति पर्यावरण एवं जनपक्षधर पत्रकारिता सम्मान दिया गया। इस अवसर पर पत्रकार एवं लेखक शीशपाल गुसाईं की पुस्तक 'कलम का गांधी : कुंवर प्रसून और जन-सरोकार' का लोकार्पण भी हुआ। वक्ताओं ने कहा कि जनवादी पत्रकार कुंवर प्रसून ने चिपको आंदोलन, बीज बचाओ आंदोलन, खनन विरोध, टिहरी बांध विरोध और जनपक्षधर पत्रकारिता के माध्यम से हिमालय, जंगल, जल, जमीन और जनता के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया।
उन्होंने पत्रकारिता को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनाया। लेखक शीशपाल गुसाईं ने बताया कि 244 पृष्ठों और 54 अध्यायों वाली यह पुस्तक लगभग दो वर्षों के शोध, साक्षात्कारों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। पुस्तक में प्रसून के पर्यावरण संरक्षण, समान शिक्षा, पारंपरिक बीजों के संरक्षण और सामाजिक आंदोलनों में योगदान का विस्तृत उल्लेख है। प्रथम 'कुंवर प्रसून स्मृति पर्यावरण एवं जनपक्षधर पत्रकारिता सम्मान प्राप्त करने वाले पत्रकार जगमोहन रौतेला को 11 हजार रुपये सम्मान राशि, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किया गया। यह सम्मान उत्तराखंड में पर्यावरण और जन-सरोकारों पर उनकी दीर्घकालीन पत्रकारिता के लिए दिया गया। गोष्ठी में प्रो. जयंत बंद्योपाध्याय, विजय जड़धारी, राजीव लोचन साह, राजीव नयन बहुगुणा, जय सिंह रावत और संजय कोठियाल सहित अनेक वक्ताओं ने कुंवर प्रसून के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, गोविंद पंत राजू, चारु तिवारी, योगेश भट्ट तथा बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार, पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
लेखक के बारे में
Shailendra Semwalशॉर्ट बायो : शैलेन्द्र सेमवाल पिछले 28 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में दैनिक हिन्दुस्तान देहरादून में सीनियर कंटेंट क्रिएटर के रुप में कार्यरत हैं।
परिचय एवं अनुभव:
पिछले 28 सालों के सफर में शैलेन्द्र सेमवाल ने प्रिंट मीडिया क्षेत्र में विविध विषयों वाले आलेख लिखे हैं। 2008 से वह हिन्दुस्तान के मसूरी सेंटर के प्रभारी रहे। उनके विषयों में इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, शोधात्मक, विश्लेणात्मक, लाइफ स्टाइल, फैशन, फिल्म वर्ल्ड और घटनात्मक खबरें रही हैं। एक फीचर कंटेंट राइटर के रुप में उन्होंने समग्र विषयों पर लिखा है। इतिहास, आंचलिक विषयों और मुद्दों पर उनका गहन अध्ययन है।
कॅरियर का सफर
शैलेन्द्र सेमवाल ने अपने प्रिंट लेखन की शुरूआत अपने स्टडी के दौरान ही कर ली थी। 2003 में अमर उजाला देहरादून में बतौर ट्रेनी कॅरियर शुरू किया। 2004 में विकासनगर और मसूरी अमर उजाला के बतौर ब्यूरो प्रमुख काम किया। वह शिमला, पौड़ी जैसी जगहों पर अमर उजाला, जागरण और हिन्दुस्तान के लिए लिख चुके हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख पत्रिकाओं में भी उनका लेखन चल रहा था। 2008 में उत्तराखंड में हिन्दुस्तान लांच होने के बाद से वह हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं। 2010 से देहरादून में कार्यरत हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि:
शैलेन्द्र सेमवाल ने सन 2000 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि से एमएससी जूलोजी करने के बाद बीजे और एमजेएमसी की डिग्री हासिल की। साहित्य रंगकर्म से जुड़ाव से उनका रुझान पत्रकारिता की ओर हुआ। साहित्य, संस्कृति, मनोरंजन, इतिहास, विज्ञान जैसी बीट पर कमांड है। उनकी शोध परक अनेक लेख ऑल एडिशन, फ्रंट पेज पर प्रकाशित होते रहे हैं।
एंटरटेनमेंट और विजन
कॅरियर में आर्ट, कल्चर, एंटरटेनमेंट, राज्य की राजनीति से जुड़े विषयों पर कई सेलिब्रिटी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का अवसर मिला। शैलेन्द्र सेमवाल का मानना है कि पत्रकारिता में विषयों की बुनियादी समझ होना जरुरी है। लगातार गहराई से जानने की जिज्ञासा रखना ही सार्थक पत्रकारिता महत्वपूर्ण अंग है।
विशेषज्ञता:
बॉलीवुड, उत्तराखंडी फिल्म संगीत, लोककला, नृत्य, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, किसी भी सेलिब्रिटी का उत्तराखंड कनेक्शन तलाशना, हिमालयी पर्यावरण, पारिस्थितिकी, सामाजिक मुद्दे, पर्यावरणीय आंदोलन, राज्य आंदोलन, राज्य का इतिहास, खोजपरक स्टोरी।
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