कैंसर मरीज की अचानक बिगड़ी तबीयत तो कुशीनगर मेडिकल कॉलेज बनेगा सहारा
कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। कैंसर से जूझ रहे मरीज की अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो

कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। कैंसर से जूझ रहे मरीज की अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे तत्काल कहां लेकर जाएं, यह होती है। इलाज चल रहे अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाले समय के बीच मरीज को तत्काल चिकित्सकीय मदद की जरूरत होती है। अब ऐसी स्थिति में कुशीनगर मेडिकल कॉलेज मरीज और उसके परिजनों के लिए पहला सहारा बनेगा। मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में कैंसर मरीजों के लिए छह बेड का डे-केयर सेंटर तैयार किया गया है। यहां अचानक तबीयत बिगड़ने पर मरीज को तत्काल भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया जाएगा और करीब छह घंटे तक उसे निगरानी में रखा जाएगा। मरीज की हालत स्थिर होने के बाद उसे आगे के उपचार के लिए उसी अस्पताल में भेज दिया जाएगा, जहां उसका कैंसर का इलाज चल रहा है।
कैंसर मरीजों के लिए प्राथमिक चिकित्सा
कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में तैयार यह डे-केयर सेंटर कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी देने के लिए नहीं है। इसका मकसद उपचार के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने वाले मरीजों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना है। कैंसर के इलाज के दौरान मरीज को बुखार, कमजोरी, उल्टी, सांस लेने में परेशानी, दवा के प्रतिकूल प्रभाव या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में परिजन मरीज को लेकर इधर-उधर भटकने के बजाय सीधे मेडिकल कॉलेज पहुंच सकेंगे। यहां चिकित्सक मरीज की प्रारंभिक जांच कर जरूरत के अनुसार दवा और उपचार देंगे। इसके बाद उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। डे-केयर सेंटर में मरीज को करीब छह घंटे तक ऑब्जर्वेशन में रखने की व्यवस्था होगी। इस अवधि में मरीज की हालत में हो रहे बदलाव पर नजर रखी जाएगी। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार मरीज को जरूरी दवा और प्राथमिक उपचार दिया जाएगा। इसका उद्देश्य मरीज को तत्काल राहत देने के साथ उसकी स्थिति को स्थिर करना होगा ताकि आगे के उपचार के लिए उसे सुरक्षित तरीके से संबंधित अस्पताल भेजा जा सके।
मरीज का अस्पताल में पुनर्वास
जिस अस्पताल में इलाज चल रहा, वहीं भेजा जाएगा मरीज :
इस सेंटर की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज का कैंसर का इलाज यहां शुरू नहीं किया जाएगा। प्राथमिक उपचार और निगरानी के बाद जब मरीज की हालत स्थिर हो जाएगी तो उसे उसी अस्पताल के लिए रेफर किया जाएगा, जहां पहले से उसका कैंसर का उपचार चल रहा होगा। यानी यदि किसी मरीज का इलाज गोरखपुर, लखनऊ या किसी अन्य अस्पताल में चल रहा है और उसकी तबीयत बिगड़ जाती है तो पहले उसे कुशीनगर मेडिकल कॉलेज लाकर तत्काल चिकित्सकीय सहायता दी जा सकेगी। स्थिति नियंत्रित होने के बाद संबंधित अस्पताल भेजने की व्यवस्था होगी। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में अभी कैंसर रोग विशेषज्ञ की नियमित तैनाती नहीं है। ऐसे में डे-केयर सेंटर को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर से जोड़ा गया है। सेंटर पर आने वाले मरीज की स्थिति जरूरत के अनुसार बीआरडी के विशेषज्ञों को बताई जाएगी और चिकित्सकीय मार्गदर्शन लिया जाएगा।
समर्थन का महत्व
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केपी गौंड ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में कैंसर मरीजों के लिए छह बेड का डे-केयर सेंटर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य अचानक तबीयत बिगड़ने पर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराना है। मरीज को करीब छह घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। हालत स्थिर होने के बाद उसे जिस अस्पताल में कैंसर का उपचार चल रहा है, वहीं आगे के उपचार के लिए रेफर किया जाएगा।


