चीनी कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लागू, 4000 कुंतल की सीमा तय
कुशीनगर में चीनी के व्यापारियों के लिए 01 अगस्त से 30 सितंबर तक की अवधि में 4000 कंतल की स्टॉक लिमिट लागू की गई है। डीएम महेन्द्र सिंह तंवर ने बताया कि इस व्यवस्था का पालन सभी व्यापारियों को करना होगा, जो पोर्टल पर अपने स्टॉक की स्थिति घोषित करेंगे और इसे हर शुक्रवार को अपडेट करेंगे।

कुशीनगर। आयुक्त, खाद्य तथा रसद विभाग लखनऊ के कार्यालय पत्र पर जिले में चीनी के व्यापारियों पर 01 अगस्त से 30 सितंबर तक की अवधि के लिए स्टॉक लिमिट लागू की गई है। यह सीमा 4000 कंतल तय की गयी है। कोई भी चीनी कारोबारी इससे अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेगा। यह व्यवस्था सरकारी खाते की चीनी व सस्ते गल्ले की दुकानों के डीलरों के स्टॉक पर लागू नहीं होगी। यह जानकारी देते हुए डीएम महेन्द्र सिंह तंवर ने बताया कि निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कोई भी चीनी डीलर किसी स्टॉक की प्राप्ति की तारीख से 30 दिन से अधिक अवधि तक उसका भंडारण नहीं करेगा तथा देश के किसी भी स्थान पर किसी भी समय 4000 कुंतल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। जनपद के सभी चीनी डीलरों को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल https://foodstock.dfpd.gov.in/ पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराते हुए चीनी के स्टॉक की स्थिति घोषित करनी होगी तथा प्रत्येक शुक्रवार को स्टॉक विवरण नियमित रूप से अपडेट करना होगा。
स्टॉक लिमिट की निगरानी
स्टॉक लिमिट के अनुपालन एवं पोर्टल पर स्टॉक विवरण के नियमित निगरानी के लिए डीएम ने तहसीलवार समितियों का गठन किया है। इनमें संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी टीम के अध्यक्ष तथा विपणन निरीक्षक, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, पूर्ति निरीक्षक एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी सदस्य के रूप में नामित किए गए हैं।
कार्रवाई की जानकारी
जिलाधिकारी श्री तंवर ने गठित टीमों को निर्देशित किया है कि अपने-अपने तहसील क्षेत्र में चीनी के व्यापारियों के स्टॉक की नियमित जांच एवं निरीक्षण करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही की गई कार्रवाई की सूचना दैनिक रूप से जिला खाद्य विपणन अधिकारी, कुशीनगर के कार्यालय में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
व्यापारियों के लिए अपील
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि चीनी के सभी व्यापारियों से अपील है कि निर्धारित स्टॉक सीमा एवं पोर्टल पर स्टॉक विवरण अपडेट करने की व्यवस्था का अनिवार्य रूप से पालन करें, जिससे आवश्यक वस्तु की उपलब्धता एवं बाजार में सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।


