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कुलभूषण जाधव मामला: महज 1 रुपये में हरीश साल्वे ने पाक को किया बेनकाब

harish salve

अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में भारत की एक तरह से बड़ी जीत हुई है और पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने बुधवार को भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगा दी और पाकिस्तान को फिर से विचार करने का आदेश दिया। आईसीजे ने व्यवस्था दी कि पाकिस्तान को भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को सुनाई गयी फांसी की सजा पर प्रभावी तरीके से फिर से विचार करना चाहिए और राजनयिक पहुंच प्रदान करनी चाहिए। यह भारत के लिए कतई बड़ी जीत है। बड़ी जीत इसलिए भी क्योंकि पाकिस्तान ने जहां इस केस में करोड़ों रुपये खर्च किये, वहीं भारत के महज एक रुपये खर्च हुए हैं। भारत की इस बड़ी जीत के सबसे बड़े नायक हैं हरिश साल्वे। हरीश साल्वे वह शख्स हैं, जिन्होंने भारत सरकार से महज एक रुपये बतौर फीस लेकर कुलभूषण जाधव की लड़ाई लड़़ी और उन्हें फांसी के तख्ते से बचाया। 

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कुलभूषण जाधव मामले में भारत की ओर से केस लड़ रहे हरीश साल्वे ने अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में पूरजोर और काफी तार्किक तरीके से दलीलें रखीं और कुलभूषण को बेगुनाह साबित करने के लिए सारे साक्ष्य उपलब्ध कराए। कुलभूषण जाधव की फांसी पर अगर रोक लगी है तो इसके पीछे हरीश साल्वे ही हैं, जिन्होंने काफी मजबूती से आईसीजे में लड़ाई लड़ी। 

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कुलभूषण मामले में आईसीजे में भारत का पक्ष रखने वाले वकील हरीश साल्वे ने बतौर फीस एक रुपये ली थी, इसकी पुष्टि खुद तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने की थी। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 15 मई 2017 को एक ट्वीट में यह जानकारी दी थी कि हरीश साल्वे ने जाधव का केस लड़ने के लिए एक रुपये लिया है। 

कुलभूषण जाधव मामले में भारत का पक्ष रखने वाले वकील हरीश साल्वे ने बुधवार को कहा कि वह आईएसीजे के फैसले से बेहद प्रसन्न हैं। यह फैसला जाधव की फांसी की सजा की तामील पर रोक लगाएगा और भारतीय नागरिक के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा। लंदन में भारतीय उच्चायोग में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए साल्वे ने कहा कि फैसले में कहा गया है कि 'जाधव को सुनाई गयी सजा पर प्रभावी तरीके से फिर से विचार करना चाहिए। इसके अनुसार उसे राजनयिक पहुंच मुहैया कराई जानी चाहिए। पाकिस्तान ने विएना समझौते का उल्लंघन किया है।

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उन्होंने कहा, ''एक वकील के तौर पर मैं संतुष्ट हूं। फैसले से मुझे राहत महसूस हुई है...अदालत ने कहा कि फांसी देने का तो प्रश्न ही नहीं है...इसलिए मैं बहुत प्रसन्न हूं। साल्वे ने कहा कि भारत के लिए अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि जाधव मामले की पाकिस्तान के कानून के तहत निष्पक्ष सुनवाई हो और उसे न्याय मिले। उन्होंने आईसीजे के फैसले को न्याय की जीत बताया।

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