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चाहे मान्यता दो या न दो, अपना शासन स्थापित करेंगे; केंद्र सरकार को मणिपुर से मिला अल्टीमेटम

आईटीएलएफ के महासचिव मुआन टोम्बिंग ने कहा कि अगर कुछ हफ्ते में हमारी मांग नहीं मानी गई तो हम अपने स्वशासन की स्थापना कर लेंगे, चाहे केंद्र इसे मान्यता दे या नहीं दे।

चाहे मान्यता दो या न दो, अपना शासन स्थापित करेंगे; केंद्र सरकार को मणिपुर से मिला अल्टीमेटम
Amit Kumarपीटीआई,इंफालWed, 15 Nov 2023 10:45 PM
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एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, मणिपुर में कुकी-जो जनजातियों के एक अग्रणी संगठन ने दावा किया है कि वे अपने प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में एक "स्वशासित अलग प्रशासन" स्थापित करने के लिए तैयार हैं, "चाहे केंद्र इसे मान्यता दे या न दे।" मणिपुर में कुकी-जो जनजातियों के संगठन, ‘इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम’ (आईटीएलएफ) ने बुधवार को उन क्षेत्रों में "पृथक स्व-शासित प्रशासन" स्थापित करने की धमकी दी, जहां ये आदिवासी बहुमत में हैं।

संगठन ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में छह महीने से अधिक समय से जारी जातीय संघर्ष के बाद भी केंद्र सरकार ने अब तक पृथक प्रशासन की उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया है। आईटीएलएफ के महासचिव मुआन टोम्बिंग ने कहा, “अगर कुछ हफ्ते में हमारी मांग नहीं मानी गई तो हम अपने स्वशासन की स्थापना कर लेंगे, चाहे केंद्र इसे मान्यता दे या नहीं दे।”

उनकी टिप्पणी उस दिन आई है जब संगठन ने चूराचांदपुर में आदिवासियों की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। आईटीएलएफ के प्रवक्ता गिन्ज़ा वुएलज़ोंग ने कहा, “ जातीय संघर्ष के दौरान कई कुकी-ज़ो आदिवासी मारे गए हैं लेकिन कोई सी भी केंद्रीय जांच एजेंसी इन मामलों की जांच नहीं कर रही है। यह रैली कुकी-ज़ो लोगों पर हुए अत्याचार के विरोध में है।”

संगठन के एक सदस्य ने कहा कि रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आदिवासियों के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए और आदिवासियों की हत्या की त्वरित जांच शुरू करने में राज्य सरकार और अन्य जांच एजेंसियों की "विफलता" की निंदा की। राज्य की राजधानी इंफाल में स्थानीय लोगों ने राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने में मणिपुर सरकार की कथित असमर्थता के विरोध में प्रदर्शन किया। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल थे।

उन्होंने गांवों में बंदूकधारियों द्वारा हमले करने की छिटपुट घटनाओं का भी विरोध किया, जिससे हजारों लोग अपने घरों को लौट नहीं पा रहे हैं। इंफाल पश्चिम जिले के कीसंपत, उरीपोक और सिंगजामेई इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने म्यांमा से बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों के प्रवेश को रोकने के लिए नारे लगाए और राज्य से उनके निर्वासन की मांग की। निंगोल चाकौबा उत्सव के अवसर को लेकर बुधवार को इंफाल घाटी के पांच जिलों में प्रमुख बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। मणिपुर में मई में शुरू हुए जातीय संघर्ष में 180 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

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