दो दिन मनेगी जन्माष्टमी, गृहस्थ और वैष्णव अलग दिन मनाएंगे पर्व
इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व विशेष शुभ फलदायक रहेगा। ज्योतिषाचार्य अशोक वार्ष्णेय के अनुसार 4 और 5 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्म दिन मनाया जाएगा। मंदिरों और घरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

हल्द्वानी, संवाददाता। कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष विशेष शुभ फलदायक रहेगा। ज्योतिषाचार्य अशोक वार्ष्णेय के अनुसार इस बार लंबे अंतराल के बाद जन्माष्टमी पर कुछ दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने के साथ चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। ऐसे में इस बार जन्माष्टमी का पर्व दो दिन अष्टमी तिथि में मनाया जाएगा। ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि 4 सितंबर की रात 2:26 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 5 सितंबर की रात 12:14 बजे तक रहेगी। उदयातिथि और रोहिणी नक्षत्र के आधार पर गृहस्थजन शुक्रवार, 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाएंगे। वहीं वैष्णवजन शनिवार, 5 सितंबर को अष्टमी तिथि में पर्व मनाएंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मदिन मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा के वृषभ राशि में होने का संयोग द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की याद दिलाता है। जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों और घरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं。
जन्माष्टमी पर पूजा और पारण का समय
ज्योतिषाचार्य नवीन चंद्र जोशी के अनुसार इस बार अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात और 5 सितंबर की रात दो दिन रहेगी। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर जन्मोत्सव मनाएंगे। 5 सितंबर को सुबह 6:05 बजे के बाद जन्माष्टमी का व्रत खोल सकते हैं। इस दौरान चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा। उदयातिथि के आधार पर गृहस्थजन 4 सितंबर शुक्रवार को, जबकि वैष्णवजन 5 सितंबर शनिवार को जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे


