श्रीभगवतगीता को घोषित किया जाए राष्ट्रीय ग्रन्थ
श्रीभगवतगीता को घोषित किया जाए राष्ट्रीय ग्रन्थ श्रीभगवतगीता को घोषित किया जाए राष्ट्रीय ग्रन्थ श्रीभगवतगीता को घोषित किया जाए राष्ट्रीय ग्रन्थ

प्रेम गली बनखण्डी स्थित प्राचीन अन्नपूर्णा देवी मंदिर में गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से निसृत श्रीमद्भागवतगीता का चिंतन मनन संतों विद्वानों की उपस्थिति में किया गया। साथ ही संदीप कुमार सुण्डा द्वारा लिखित आधुनिक कुरुक्षेत्र और कृष्ण मॉडल पुस्तक का विमोचन भी धर्माचार्यों ने किया। अन्नपूर्णा मंदिर के सेवायत पं बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा की कर्म के द्वारा गीता के अनुसार चलने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में सुख शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इसका एक एक श्लोक मानव मात्र के लिए सिद्धि प्रदान करने वाला है। महंत रामदास महाराज एवं बालशुक पुण्डरीक त्रिपाठी ने कहा कि श्रीभगवतगीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और शिक्षा के क्षेत्र में अर्जुन और श्रीकृष्ण संवाद को गीता के माध्यम से छात्र छात्राओं को पढ़ाया जाए।
लेखक संदीप कुमार सुण्डा वर्तमान तनावपूर्ण युग में प्रबन्धन और नेतृत्व के प्राचीन सिद्धांतों के विषय में बताया। उन्होंने कहा कि आज के युग में प्रत्येक परिवार में अशान्ति का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। दिनोंदिन अनेकों अप्रिय घटनाओं की संख्या में बढ़ रही है। ऐसे में श्रीमद्भागवतगीता का सहारा मनुष्य को लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरी पुस्तक सभी के लिए आत्म शान्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत ही कारगर सिद्ध होगी।इस अवसर पर गोविन्द त्रिपाठी, राजेश शास्त्री, अजय शर्मा, आचार्य भगवान दास, भजन गायक रूपेश शर्मा ,अनिल शास्त्री,अंकित शास्त्री प्रदीप गोस्वामी बिंदु ,अशोक गोस्वामी आदि उपस्थित थे ।


