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3 सितम्बर, 2020|10:35|IST

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मंगलौर प्लेन क्रैश की जांच करने वाले एक्सपर्ट ने बताया- किन वजहों से हुआ होगा कोझिकोड विमान हादसा

kozhikode plane crash

केरल के कोझिकोड में हुए विमान हादसे के बाद एयर मार्शल (रिटायर्ड) भूषण गोखले ने घटना की कुछ संभावित वजहों के बारे में बताया है। गोखले ने वर्ष 2010 में हुए मंगलौर विमान हादसे की जांच की थी। उस हादसे में 158 लोगों की मौत हो गई थी। एयर मार्शल (रि.) भूषण गोखले ने कहा, 'साल 2010 के मंगलौर हादसे में 158 लोग मरे थे। इसके मुकाबले कोझिकोड में कम लोगों की मौत हुई। मंगलौर में 158 लोगों की मृत्यु इस वजह से हुई थी, क्योंकि तब विमान में आग लग गई थी। विमान काफी नीचे गिर गया था, जिसकी वजह से सिर्फ 8 लोगों की ही जान बच सकी थी। वहीं, कोझिकोड हादसे में, विमान तकरीबन 30-40 फुट तक ही नीचे गिरा।'

भूषण ने वजहों को बताते हुए कहा, 'केरल में उस दिन काफी ज्यादा बारिश हो रही थी। रनवे पर बारिश की वजह से काफी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रनवे पर पानी निकालने के लिए बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और ज्यादा से ज्यादा 3 एमएम तक वॉटर फिल्म हो सकती है।' उन्होंने बताया कि लैंडिंग के दौरान, ब्रेक लगाने की वजह से विमान के पहिए लॉक हो जाते हैं। अगर उस समय पानी ज्यादा है तो विमान फिसल जाएगा। ऐसे में, विमान या तो दाएं या बाएं जा सकता है लेकिन रुक नहीं सकता।

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उन्होंने कहा, 'लैंडिंग के समय विमान के टायर में मौजूद रबर पिघल जाता है और इसीलिए धुआं निकलता है।' इससे पहले, डीजीसीए के अधिकारियों ने बताया था कि कोझिकोड में भारी बारिश के चलते हादसे वाले समय विजिबिलिटी दो हजार मीटर थी। रनवे 10 पर विमान के लैंड होने के बाद वह आगे चलते हुए नीचे खाई में गिर गया।

भूषण ने बताया कि टेबल-टॉप रनवे पर लैंडिंग कराने में कोई दिक्कत नहीं आती है। बस पायलट को ज्यादा कौशल और सावधानी की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, 'भारत और दुनियाभर में कई टेबल-टॉप रनवे हैं। इससे डरने की कोई वजह नहीं है। कोझिकोड का रनवे मंगलौर की तुलना में ज्यादा बड़ा है। लेकिन, टेबल-टॉप रनवे के लिए डीजीसीए के नियम हैं। इस तरह के रनवे पर लैंडिंग से पहले पायलट को विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग की जरूरत होती है। इस तरह के एयरपोर्ट्स पर अलग तरीके की सावधानियां बरतनी होती हैं।'

रिटायर्ड एयर मार्शल ने कहा कि जांच पैनल इस बात पर भी गौर करेगा कि यदि दृश्यता में कोई समस्या थी तो पायलटों ने कोझिकोड में ही उतरने का फैसला क्यों किया? उन्होंने कहा, 'जैसा की मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि विजिबिलिटी उस दिन दो हजार मीटर की थी, तब यह अच्छी विजिबिलिटी है। यहां तक की हम लोग पांच सौ मीटर की दृश्यता को भी बेहतर मानते हैं।'

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वहीं, टेबल-टॉप रनवे पर हवा काफी मायने रखती है। लैंडिंग के समय पायलट इसका भी ध्यान रखता है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि हालात ठीक नहीं रहे हों, इसी वजह से पायलट ने एयरपोर्ट के चक्कर लगाए और फिर विमान को उतारने का प्रयास किया। इस तरह की लैंडिंग के लिए भी डीजीसीए के कुछ एसओपी हैं। जांच पैनल इस पर भी गौर करेगा।

उन्होंने बताया कि पायलट कहीं और भी लैंड कर सकते थे, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि विमान में ईंधन कितना बचा था।एक और बात यह है कि दूसरी जगह का मौसम कैसा था? यह जांच के बाद ही सामने आएगा कि उन्होंने (पायलट) कोझिकोड में ही उतरने का फैसला क्यों किया।

भूषण ने कहा कि एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान से बरामद डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) हादसे के पीछे के कारणों का खुलासा करेंगे। उन्होंने कहा, 'यह अच्छा है कि DFDR मिल गया है। सीवीआर भी मिल गया है, जो यह पता लगाने में मदद करेगा कि पायलट क्या बात कर रहे थे। जैसे कि- इंजन की समस्या, ईंधन की उपलब्धता, नियंत्रण मुद्दा और ब्रेकिंग समस्या आदि। इन चीजों को डीएफडीआर में दर्ज किया जा चुका होगा।  मंगलौर की घटना में यह दोनों उपकरण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।'

उन्होंने बताया, 'मैं अध्यक्ष था और मेरे साथ एक अनुभवी पायलट थे। दो इंजीनियर थे और एटीसी के अधिकारी थे जो रनवे, मौसम विशेषज्ञों और डॉक्टरों के विशेषज्ञ थे। एक समग्र टीम होनी चाहिए। इन मामलों में चिकित्सा कारण भी सामने आने चाहिए।' भूषण ने बताया कि 2010 के मंगलौर की घटना की जांच के बाद, हमने 40-50 सुझाव दिए और जिन्हें लागू भी किया गया। हमें इस घटना के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी। मंगलौर की घटना में पायलट सो गया था।

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  • Web Title:Kozhikode Plane Crash: Expert who investigated Mangalore plane crash lists reasons for Kozhikode mishap