सुपौल : बेला गोठ में तेज कटाव से दहशत, परिवारों का पलायन शुरू
किशनपुर में कोसी नदी का कटाव विकराल रूप धारण कर रहा है, जिससे ग्रामीणों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ रहा है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते राहत सहायता नहीं मिल रही है। कटाव के कारण प्रभावित परिवारों की स्थिति गंभीर है।

किशनपुर, एक संवाददाता। कोसी तटबंध के भीतर दुबियाही पंचायत के बेला गोठ वार्ड 6 में कोसी नदी का कटाव लगातार विकराल रूप धारण करता जा रहा है। बीते कई दिनों से जारी कटाव के कारण ग्रामीणों के घर एक-एक कर कोसी नदी में समाते जा रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपने आशियाने को उजाड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को विवश हैं। वहीं कटाव रोकने के लिए विभाग द्वारा कराए गए बांस पाइलिंग कार्य का भी कोई असर नहीं दिख रहा है।
प्रशासन की उदासीनता
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में अब तक कोई उनकी सुधि लेने नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि कोसी नदी की धारा तेजी से आबादी की ओर बढ़ रही है। हर दिन कटाव की रफ्तार बढ़ने से लोगों में भय का माहौल है। नदी किनारे बसे कई परिवार अपने घरों का सामान समेटकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं, जबकि कई परिवार अभी भी भय के साये में दिन-रात गुजार रहे हैं। उनका कहना है कि कभी भी बची हुई बस्तियां भी कोसी की धारा में समा सकती हैं। कटाव को रोकने के लिए विभाग की ओर से कराई गई बांस पाइलिंग भी बेअसर साबित हो रही है।
विस्थापित परिवारों की शिकायतें
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार आवेदन देकर कटाव निरोधी कार्य की मांग की गई थी, जिसके बाद बांस पाइलिंग कराई गई। लेकिन तेज धारा के सामने यह व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। इससे कटाव की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई और लगातार लोगों के घर नदी में समाते जा रहे हैं। कटाव से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनका जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। घर उजड़ने के बाद भी अब तक सरकार की ओर से न तो पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई गई है और न ही खाने-पीने की कोई व्यवस्था की गई है। छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विस्थापित परिवार खुले आसमान के नीचे या ऊंचे स्थानों पर जैसे-तैसे जीवन गुजार रहे हैं।
आवश्यक संसाधनों की कमी
विस्थापित परिवार राजेश मंडल, ललादेव मंडल, रामविलास मंडल,राजेंद्र साह, परमेश्वर मंडल, जीवछ मंडल सहित ग्रामीणों ने बताया कि कोसी नदी का कटाव हर वर्ष उनकी जिंदगी में तबाही लेकर आता है। हर साल घर उजड़ता है और फिर किसी तरह नया आशियाना बनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन अब नरक के समान हो गया है। आपदा के समय न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं और न ही जनप्रतिनिधि उनकी समस्याओं को सुनने आते हैं। पशुओं के लिए चारे का भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, लेकिन इस दिशा में भी कोई पहल नहीं की जा रही है। इस संबंध में प्रभारी सीओ मो जियाउल कमर ने बताया कि कटाव से विस्थापित परिवारों की सूची तैयार कर जिला प्रशासन को भेज दी गई है। जिला से आवश्यक निर्देश प्राप्त होने के बाद कोई राहत समग्रीह बाटे जाएगे।


