सुपौल : मौजहां में नहीं थम रहा कोसी का कटाव, 40 परिवार विस्थापित
कोसी नदी का रौद्र रूप मौजहां पंचायत के लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। लगातार हो रहे कटाव के कारण 40 परिवार विस्थापित हो चुके हैं। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल मदद की मांग की है। स्थिति गंभीर है और कटाव जारी रहने पर कई परिवार बेघर हो सकते हैं।

किशनपुर, एक संवाददाता। कोसी नदी का रौद्र रूप मौजहां पंचायत के लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। पंचायत के वार्ड 10, 13, 14 और 15 में पिछले कई दिनों से लगातार हो रहे कटाव से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। नदी की तेज धारा उपजाऊ जमीन को काटते हुए अब लोगों के घरों तक पहुंच गई है। शुक्रवार तक करीब 40 परिवार विस्थापित हो चुके हैं। पीड़ित अपने घरों को तोड़कर जरूरी सामान, मवेशी और घरेलू उपयोग की वस्तुएं लेकर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
कटाव की भयावहता
ग्रामीणों का कहना है कि कोसी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटाव का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी किनारे बसे लोगों के चेहरों पर भय साफ दिखाई दे रहा है। लोगों को आशंका है कि यदि कटाव इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो सकते हैं। मौजहां पंचायत में कटाव की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई परिवार अपने घर खाली करने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि घर के आसपास की जमीन तेजी से नदी में समाती जा रही है। ऐसे में लोग किसी तरह अपने घरों को तोड़कर सामान निकाल रहे हैं और सुरक्षित स्थानों की तलाश में जा रहे हैं।
सरकारी सहायता की मांग
मुखिया अगर कुमार चौधरी ने बताया कि पंचायत के वार्ड 10, 13, 14 और 15 के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से तत्काल बाढ़ निरोधात्मक एवं सुरक्षात्मक कार्य शुरू कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। कई घरों के आंगन और दरवाजे तक पानी पहुंच गया है। मवेशियों के लिए चारे की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले आई बाढ़ से किसी तरह लोग उबर ही रहे थे कि दोबारा पानी बढ़ने और कटाव शुरू होने से परेशानी बढ़ गई। तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों को हर वर्ष बाढ़ और कटाव का सामना करना पड़ता है।
स्थाई समाधान की आवश्यकता
शंकर कुमार, संतोष यादव, जीवछ यादव सेमला देवी मो सबिर, मो मजीद, मो नसीम, मो मस्जिद,मो सद्दाम, रेणु देवी,का आरोप है कि आपदा के समय सरकारी सहायता की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जरूरत के समय सभी परिवारों तक समुचित मदद नहीं पहुंच पाती है। जिला परिषद सदस्य हसनैन नोमानी ने बताया कि मौजहां पंचायत का वार्ड 15 लगभग पूरी तरह कोसी में विलीन हो चुका है। कुछ परिवारों के घर ही अब बचे हैं और वे भी अपना आशियाना दूसरी जगह बसाने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से नदी लगातार जमीन और घरों को काटकर अपने साथ ले जा रही है। उन्होंने बताया कि वार्ड 10, 13, 14 और 15 में लगातार उपजाऊ जमीन का कटाव हो रहा है। समय रहते प्रशासन ने सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं किया तो बचे हुए वार्डों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कोसी नदी का कोई स्थायी रास्ता नहीं है। नदी जब चाहती है, अपना रास्ता बदल लेती है। यही कारण है कि हर साल तटबंध के भीतर बसे लोगों को बाढ़ और कटाव के भय में जीवन बिताना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार हर वर्ष बाढ़ और आपदा राहत पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन तटबंध के भीतर रहने वाले परिवारों के स्थायी पुनर्वास और कटाव से बचाव की ठोस व्यवस्था नहीं होने से लोग बार-बार घर बनाते और उजाड़ते रहने को मजबूर है।
प्रशासन की ओर से पहल
प्रभारी सीओ जियाउल कमर ने बताया कि कोसी नदी का जलस्तर अब घट रहा है। प्रभावित परिवारों के बीच 365 पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई गई हैं। लोगों की आवाजाही के लिए छह सरकारी नावें बहाल की गई हैं। सूखा राशन उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर सूची भेजी गई है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल तीन सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। जलस्तर में कमी आने के साथ स्थिति सामान्य होने पर धीरे-धीरे सामुदायिक रसोई बंद की जाएगी। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों पर नजर रखी जा रही है।


