अभिषेक बनर्जी की याचिका पर जज ने खुद को सुनवाई से अलग किया
कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अभिषेक ने विधायकों के हस्ताक्षरों में विसंगति के मामले में सीआईडी द्वारा छापेमारी को चुनौती दी थी। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि वह मामले की सुनवाई नहीं करेंगे क्योंकि इससे जुड़े अन्य मामलों में पहले से याचिका दायर की गई है।

कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने सोमवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। ये वो याचिका है, जिसमें अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सीआईडी द्वारा विधायकों के हस्ताक्षरों में विसंगति मामले में पार्टी के दो कार्यालयों पर की गई छापेमारी को चुनौती दी थी। अभिषेक बनर्जी और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 9 जून को जब इंडिया गठबंधन की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली में थे, तब सीआईडी की दो टीमों ने टीएमसी के दो कार्यालयों पर एकसाथ छापेमारी की थी। जिन दो पार्टी कार्यालयों पर छापे मारे गए, उनमें से एक दक्षिण कोलकाता के हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित ममता बनर्जी के आवास के पास था, जबकि दूसरा मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित वो कार्यालय था, जहां अभिषेक बनर्जी अपना काम करते थे।
इन छापों के खिलाफ न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की अवकाश पीठ में एक याचिका दायर की गई थी। हालांकि, सोमवार को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि चूंकि अभिषेक बनर्जी ने विधायकों के हस्ताक्षरों के मिलान में गड़बड़ी के मामले में सीआईडी द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए इसी अदालत की एक अन्य एकल-जज पीठ के समक्ष पहले ही एक अलग याचिका दायर कर दी है, इसलिए वे उसी मामले से संबंधित किसी अन्य मामले की सुनवाई नहीं करेंगे। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि चूंकि एक ही मामले में दो एकल-न्यायाधीश पीठों के फैसले एक-दूसरे के विपरीत हो सकते हैं।
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