महाराष्ट्र में कौन हो सकता है प्रोटेम स्पीकर, इस रेस में BJP के ये तीन विधायक
महाराष्ट्र में रातोंरात हुए महाउलटफेर के बाद बनी देवेंद्र फडणवीस सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बहुमत साबित करने के लिए कहा है। बहुमत परीक्षण के लिए कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के आदेश...

महाराष्ट्र में रातोंरात हुए महाउलटफेर के बाद बनी देवेंद्र फडणवीस सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बहुमत साबित करने के लिए कहा है। बहुमत परीक्षण के लिए कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के आदेश भी दिए हैं। अब सभी की नजरें प्रोटेम स्पीकर बनने वाले चेहरे पर टिकी हैं।
नियम-कायदे कहते हैं कि सदन के सबसे वरिष्ठ विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाना चाहिए। अमूमन प्रोटेम स्पीकर का काम सदस्यों को शपथ दिलाना होता है। जबकि फ्लोर टेस्ट स्पीकर के सामने होता है। मगर कुछ परिस्थितियों में कोर्ट के आदेश पर प्रोटेम स्पीकर के सामने भी फ्लोर टेस्ट होता है। ऐसा पूर्व में भी होता आया है।
सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय ने 17 वरिष्ठ विधायकों की सूची राजभवन को भेजी है। सूची में शामिल तीन भाजपा विधायकों में हरिभाऊ बागड़े, बबनराव पाचपुते और कालिदास कोलम्बकर हैं। इसमें हरिभाऊ पिछली विधानसभा में स्पीकर रह चुके हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट बुधवार को, होगा लाइव प्रसारण
महाराष्ट्र के विपक्षी दलों की याचिकाओं पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बुधवार शाम पांच बजे से पहले विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का अंतरिम निदेर्श दिया। शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति एन.वी. रमना, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की सदस्यता वाली पीठ ने विपक्षी दलों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि विधायकों ने शपथ ग्रहण नहीं किया है, इसलिए 27 नवंबर को जल्द से जल्द बहुमत परीक्षण हो जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि बहुमत परीक्षण बुधवार शाम पांच बजे से पहले हो जाना चाहिए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इसके लिए एक प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाएगा और बहुमत परीक्षण गुप्त मतदान द्वारा नहीं होगा और सदन की कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि विधायकों का शपथ ग्रहण बुधवार शाम पांच बजे से पहले होना चाहिए।
शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत में आवेदन कर देवेंद्र फडणवीस सरकार को महत्वपूर्ण निर्णय लेने से रोकने का आग्रह किया। शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर जवाब देने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है।


