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लादेन को मारने वाला हेलीकॉप्टर ‘चिनूक’ वायुसेना में शामिल, जानें खासियत

 chinook helicopter

अमेरिका से खरीदे गए ‘चिनूक’ हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिए गए हैं। वायुसेना प्रमुख बी. एस. धनोआ ने कहा कि इन हेलीकॉप्टरों और इसी साल शामिल होने जा रहे लड़ाकू विमान राफेल से वायुसेना को मजबूती मिलेगी। 

वायुसेना ने बताया कि सोमवार को चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर एक समारोह में चार चिनूक हेलीकॉप्टरों को वायुसेना में शामिल किया गया। अमेरिका से 1.5 अरब डॉलर में कुल 15 चिनूक हेलीकॉप्टर खरीदे गए हैं जिनमें से चार की खेप सोमवार को चंडीगढ़ पहुंची। चिनूक बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर है जिनका उपयोग दुर्गम और ज्यादा ऊंचाई वाले स्थानों पर जवानों, हथियारों, मशीनों तथा अन्य प्रकार की रक्षा सामग्री को ले जाने में किया जाएगा। ये 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं तथा 10 टन तक का वजन ले जा सकते हैं।

चिनूक का निर्माण बोइंग कंपनी करती है। हालांकि ये 1962 से प्रचलन में हैं। लेकिन बोइंग ने समय-समय पर इनमें सुधार किया है, इसलिए आज भी करीब 25 देशों की सेनाएं इनका इस्तेमाल करती हैं। खुद अमेरिका इनका महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में इस्तेमाल करता है। अमेरिका ने जब पाकिस्तान में घुसकर लादेन का खात्मा किया था तो चिनूक हेलीकॉप्टरों का ही इस्तेमाल किया था।

‘चिनूक’ की तैनाती चंडीगढ़ में 

वायुसेना को जल्दी ही अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों की भी आपूर्ति होने वाली है। चिनूक के साथ ही रक्षा मंत्रालय ने 2015 में 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद को भी मंजूरी दी थी। जिनकी आपूर्ति भी सितंबर से शुरू हो जाएगी। इस प्रकार चिनूक, अपाचे और राफेल वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। चिनूक की तैनाती चंडीगढ़ और अपाचे की पठानकोट में होगी। 

‘चिनूक’ हेलीकॉप्टर की खासियत 

-यह रात में भी उड़ान भरने और ऑपरेशन करने में सक्षम होते हैं
-किसी भी मौसम में उपयोग किया जा सकता है
-सभी प्रकार के परिवहन में इस्तेमाल किया जा सकता है
-असैन्य कार्यों जैसे आपदा प्रबंधन और आग बुझाने में भी इस्तेमाल संभव
-इनमें विमान की भांति एकीकृत डिजिटल कॉकपिट मैनेजमेंट सिस्टम है
 -इस हेलीकॉप्टर को अमेरिकी कंपनी बोइंग ने तैयार किया है
 -11 टन पेलोड और 45 सैनिकों का भार वहन करने की अधिकतम  क्षमता है चिनूक में
 
घने कोहरे में भी एक्शन लेने में सक्षम

घने कोहरे और धुंध में भी यह एक्शन लेने में सक्षम है। यह बेहद कुशलता से मुश्किल से मुश्किल जमीन पर भी ऑपरेट कर सकता है। इसे हर मौसम में हर दिन-हर मिनट ऑपरेट किया जा सकता है।

गेम चेंजर साबित होगा चिनूक

बेहद तेज रफ्तार हेलीकॉप्टर चिनूक 315 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। यह मल्टी रोल, वर्टिकल लिफ्ट प्लेटफॉर्म वाला हेलीकॉप्टर है। जो सैनिकों और उनके हथियार, साजोसामान और ईंधन को लेकर एक जगह से दूसरी जगह जा सकता है।

इन देशों के पास है ‘चिनूक’

फरवरी 2007 में पहली बार नीदरलैंड इस हेलीकॉप्टर का पहला विदेशी खरीददार बना था। उसने CH-47F के 17 हेलीकॉप्टर खरीदे थे। इसके बाद 2009 में कनाडा ने CH-47F के 15 अपग्रेड वर्जन हेलीकॉप्टर खरीदे थे। दिसंबर 2009 में ब्रिटेन ने भी इस हेलीकॉप्टर में अपनी रुचि दिखाई और 24 हेलीकॉप्टर खरीदे। 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने पहले सात और फिर तीन CH-47D हेलीकॉप्टर खरीदे थे। 2016 में सिंगापुर ने 15 हेलीकॉप्टर का ऑर्डर कंपनी को दिया था। अब तक कुल 26 देशों के पास ये हेलीकॉप्टर मौजूद है। 

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