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किसान क्रांति यात्रा 2018: जानिए क्या हैं स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें

Bharatiya Kisan union farmers seen during Kisan Kranti Yatra, at NH58 main road, in Ghaziabad on Oct

जब-जब किसी राज्य में किसान आंदोलन होता है, तब-तब स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों का मुद्दा चर्चा में आता है। किसान संगठन लंबे समय से स्वामीनाथ कमेटी की सिफारिशों को लागू किए जाने की मांग करते रहे हैं। दरअसल इस कमेटी की रिपोर्ट में किसानों की स्थिति सुधारने के लिए कई तरह के सुधारों की सिफारिश की गई थी। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने इस रिपोर्ट को अभी तक लागू नहीं किया है। यहां जानिए स्वामीनाथन कमेटी और उसके दवारा की गई सिफारिशों के बारे में - 
 
किसानों की आर्थिक हालत को बेहतर करने के उद्देश्य से 18 नवंबर 2004 को केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था। प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन को अपने देश में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। स्वामीनाथन जेनेटिक वैज्ञानिक हैं। इस आयोग ने दिसंबर 2004 से अक्टूबर 2006 के बीच सरकार को पांच रिपोर्ट सौंपी थीं। 

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मुख्य सिफारिशें 
स्वामीनाथन कमेटी ने सिफारिश की कि किसानों को बनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। इन बुनियादी संसाधनों में भूमि, पानी, बायोरिसोर्स, जमा और बीमा, टेक्नोलॉजी व नॉलेज मैनेजमेंट व बाजार शामिल है। आयोग ने माना कि कृषि को राज्य सूची की बजाय समवर्ती सूची में लाया जाना चाहिेए। इससे केंद्र व राज्य दोनों इस संबंध में आगे आकर कदम उठाएंगे। 

- स्वामीनाथ आयोग की रिपोर्ट में भूमि सुधारों पर जोर दिया गया। अतिरिक्त व बेकार जमीन को भूमिहीनों में बांटना और वनों में पशु चराने का हक देना आदि है। 
- कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए गैर-कृषि कार्यों को लेकर मुख्य कृषि भूमि और वनों का डायवर्जन न किया जाए।
- नेशनल लैंड यूज एडवाइजरी सर्विस का गठन किया जाए। यह लैंड यूज से संबंधित होगी। 
- कृषि भूमि को बेचने के लिए एक तंत्र बनाया जाए। इस तंत्र में भूमि की मात्रा, किस उद्देश्य के लिए उसका इस्तेमाल किया जाना है, खरीदार कौन है, इन सभी पर ध्यान दिया जाए। 
- फसल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम किसानों को मिले।
- फसल कर्ज की ब्याज दर 4 प्रतिशत तक लाई जाए।
- कर्ज वसूली पर रोक लगे।
- महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं।
- गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाया जाए।
- महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं। 
- किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल सके।

आत्महत्या रोकने की कोशिश
- गावों में प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटरों पर किसानों को सस्ती हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम उपलब्ध करवाई जाए।
-  नेशनल रूरल हेल्थ मिशन का विस्तार किया जाए।
-  माइक्रो फाइनेंस नीतियों को फिर से बनाया जाए
- सभी फसलों को फसल बीमा के तहत लाया जाए

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