राजा परीक्षित ने कलियुग को पांच स्थानों में रहने की दी अनुमति
राजा परीक्षित ने कलियुग को पांच स्थानों में रहने की दी अनुमति। धर्म रूपी गाय को बचाकर राजा ने अधर्म से दूर रहने का संदेश दिया। जीयर स्वामी जी महाराज ने यज्ञ में राजा परीक्षित और कलियुग का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जुआ, मद्यपान, अनैतिक आचरण, हिंसा और धन में कलियुग के स्थान हैं।

राजा परीक्षित ने कलियुग को पांच स्थानों में रहने की दी अनुमति धर्म रूपी गाय को कलियुग से बचाकर राजा ने दिया अधर्म से दूर रहने का संदेश चातुर्मास यज्ञ में जीयर स्वामी जी ने सुनाया राजा परीक्षित और कलियुग का प्रसंग भभुआ, नगर संवाददाता। सदर प्रखंड के परसियां गांव के पास आयोजित चातुर्मास महायज्ञ में प्रवचन करते हुए श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने राजा परीक्षित और कलियुग के प्रसंग का वर्णन किया।
राजा परीक्षित का विवरण
उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित धर्मात्मा, प्रजापालक और भगवान के परम भक्त थे। उनके राज्य में धर्म का पालन होता था और प्रजा सुखी थी। एक दिन भ्रमण के दौरान राजा परीक्षित ने देखा कि कलियुग धर्म रूपी गाय को पीटकर दौड़ा रहा है। धर्म रूपी गाय अत्यंत कमजोर हो चुकी थी। उसके तीन पैर नष्ट हो चुके थे और वह केवल एक पैर के सहारे खड़ी थी। उन्होंने बताया कि यह दृश्य देखकर राजा परीक्षित का क्षत्रिय धर्म जाग उठा।
कलियुग की प्रार्थना
उन्होंने तत्काल कलियुग को रोक दिया और धर्म तथा पृथ्वी को अभय प्रदान किया। राजा ने कलियुग से कहा कि मेरे राज्य में तुम्हारे लिए कोई स्थान नहीं है। तुम यहां से चले जाओ। इस पर कलियुग ने राजा परीक्षित से अपने रहने के लिए स्थान देने की प्रार्थना की। बार-बार आग्रह करने पर राजा ने उसे पांच स्थानों पर रहने की अनुमति दी।
कलियुग के पांच स्थान
महाराज ने बताया कि राजा परीक्षित ने कलियुग को जुआ, मद्यपान, अनैतिक स्त्री-संग, हिंसा और स्वर्ण में रहने का स्थान दिया। उन्होंने कहा कि जुआ मनुष्य के भीतर छल और असत्य को बढ़ाता है। मद्यपान विवेक को नष्ट करता है। अनैतिक आचरण से चरित्र का पतन होता है, जबकि हिंसा मनुष्य को क्रूर बना देती है। वहीं स्वर्ण अर्थात धन के प्रति अत्यधिक मोह से लोभ, अहंकार, झूठ और वैर की भावना उत्पन्न होती है।
धर्म के चार चरण
धर्म के चार चरणों को विस्तार से बताया श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि धर्म के चार चरण सत्य, तप, पवित्रता और दया है। कलियुग के प्रभाव से धर्म के तीन चरण समाप्त हो गए और केवल सत्य का एक चरण बचा। राजा परीक्षित ने धर्म की रक्षा करते हुए उसे अभय दिया। यह प्रसंग वर्तमान समाज के लिए भी बड़ी सीख है। मनुष्य यदि जुआ, मद्यपान, हिंसा, अनैतिक आचरण और धन के अहंकार से दूर रहकर सत्य, दया और सदाचार का पालन करे तो वह कलियुग के प्रभाव से बच सकता है। कलियुग में सत्संग, भगवान का नाम और धर्म का आश्रय ही मनुष्य के जीवन को सही दिशा दे सकता है। कैप्शन- भभुआ प्रखंड के परसियां गांव में चल रहे चातुर्मास महायज्ञ में श्रीजीयर स्वामी जी महाराज से राजा परीक्षित और कलियुग के प्रसंग सुनते श्रद्धालु।


