Khadi India Ready To Explore World Modi Govt Special preparation - खादी को पूरी दुनिया में मिलेगी अलग पहचान, मोदी सरकार ने की खास तैयारी DA Image

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खादी को पूरी दुनिया में मिलेगी अलग पहचान, मोदी सरकार ने की खास तैयारी

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कई क्षेत्रों में आर्थिक सुस्ती के संकेतों के बावजूद खादी सेक्टर फलने-फूलने की उम्मीदें जगा रहा है। देश और विदेश में खादी की बिक्री, मांग, उत्पादन और खपत में बढ़ोतरी का स्तर बरकरार रखने के लिए केंद्र सरकार ने दुनिया में इसकी अलग पहचान के लिए जरूरी एचएस कोड दिलाने का फैसला किया है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि एचएस कोड से विदेशों में खादी की अलग पहचान होगी। यह प्रक्रिया इसी माह या अगले माह तक पूरी हो जाएगी। अभी हमारा एचएस कोड अलग नहीं है इसकी वजह से हम विदेशों में बिक्री की सटीक मात्रा का पता नहीं लगा पाते। अभी खादी की गिनती पूरे टेक्सटाइल में होती है। 

क्या है एचएस कोड : एचएस कोड (हारमोनाइज्ड सिस्टम) अंतरराष्ट्रीय कोड होता है इसकी स्वीकार्यता पूरी दुनिया में होती है। अब एचएस कोड से विदेशों में खपत को टेक्सटाइल से अलग चिन्हित किया जा सकेगा। 

विदेशी मेहमानों को लुभा रही : सूत्रों ने कहा कि खादी सॉफ्ट डिप्लोमेसी में भी मददगार हो रही है। करीब 60 देशों तक खादी की पहुंच अच्छी हुई है। विदेशी मेहमानों को दिए जाने वाले उपहारों में खादी प्रमुख है। पिछले साल विदेशों में अपने मिशन के सहयोग से 60 देशों में खादी की प्रदर्शनी लगाई गई। खादी के प्रचार पर लगातार काम हो रहा है।

आधुनिक चरखों में हुआ इजाफा : देशभर में 32000 आधुनिक चरखे उपलब्ध कराए गए हैं। पहले एक गांधी चरखा पहले दो हैंक एक दिन में बनते थे, अब एक चरखे से 24 से 25 हैंक प्रतिदिन बन रहे हैं। चरखा चलाने में भी आसानी होती है। सक्सेना ने कहा कि हर क्षेत्र की अपनी विशेषता है। हर जगह इस विशेषता को ध्यान में रखकर उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। असम में मूंगा सिल्क, बिहार में मोटी खादी, बंगाल में महीन मलमल, यूपी में खादी की मोटी दरी वाली चादरें मिलेंगी, गुजरात में बढ़िया कपड़ा देने की योजनाओं पर काम हो रहा है।  

सुस्ती का कोई असर नहीं, 30 फीसदी की वृद्धि : पिछले चार साल में खादी की बिक्री में औसत वृद्धि 30 फीसदी बनी हुई है। टेक्सटाइल सेक्टर में खादी का योगदान दोगुना हुआ है। खादी आयोग के चेयरमैन ने कहा कि दो अक्तूबर को एक करोड़ 27 लाख 57 हजार रुपये की खादी की बिक्री अकेले दिल्ली में हुई थी। खादी बिक्री के मामले में पुराना रिकॉर्ड टूटा था। उन्होंने कहा, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि खादी के क्षेत्र में कोई सुस्ती नहीं बल्कि बढ़ोतरी दर्ज हो रही है।

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