चार दशक से चकमा दे रहे कुरूप को झारखंड के अस्पतालों में तलाश रही केरल पुलिस
चार दशक से फरार केरल के कुख्यात अपराधी सुकुमारा कुरूप की तलाश अब झारखंड के अस्पतालों में शुरू हो गई है। वह चाको हत्या मामले का मुख्य आरोपी है और अपने इलाज के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। केरल क्राइम ब्रांच अब उसके पुराने मेडिकल रिकॉर्ड की खोज कर रही है।

चार दशक से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहे केरल के कुख्यात सुकुमारा कुरूप की तलाश अब झारखंड के अस्पतालों तक पहुंच गई है। केरल के चर्चित चाको हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुरूप ने दिल की बीमारी के इलाज के लिए कभी पीसी जोशी तो कभी पीएस जोशी नाम का सहारा लिया था। इसी फर्जी पहचान के सहारे उसके झारखंड में (तब बिहार) इलाज कराने के मिले पुराने सुरागों को खंगालने के लिए केरल क्राइम ब्रांच की टीम सोमवार को शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) पहुंची। यहां अधीक्षक डॉ डीके गिंदोरिया से मिलकर पुराने मेडिकल रिकॉर्ड में पीएस जोशी अथवा पीसी जोशी नाम से इलाज कराने वाले मरीजों की जानकारी तलाशने का आग्रह किया है।
अधिकारियों की मानें
अधिकारियों की मानें तो जनवरी 1984 से फरार सुकुमार कुरूप देश में सबसे अधिक समय से फरार अपराधियों में शीर्ष पर है। इसके बाद 1986 से फरार मुंबई का गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम का नाम आता है। जानकारी के अनुसार सुकुमारा कुरूप जनवरी 1984 में केरल के अलप्पुझा जिले में हुए बहुचर्चित चाको हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। उसपर अपने साथियों के साथ मिलकर चाको की हत्या करने और शव को इस तरह जलाने का आरोप है कि उसकी पहचान कुरूप के रूप में कराई जा सके। इस हत्या के पीछे उसका मकसद करीब आठ लाख रुपये की जीवन बीमा की राशि हासिल करना था। वारदात के बाद कुरूप का ड्राइवर पोन्नप्पन, बहनोई भास्कर पिल्लई और साथी चिन्नक्कल शाहू पकड़े गए थे। पोन्नप्पन और भास्कर पिल्लई को उम्रकैद की सजा हुई, जबकि शाहू बाद में सरकारी गवाह बन गया। कुरूप घटना के बाद से ही फरार है।
1989 से है झारखंड कनेक्शन
कुरूप का झारखंड कनेक्शन नया नहीं है। वर्ष 1989 में बोकारो के एक अस्पताल में उसके जैसा दिखने वाला व्यक्ति हृदय संबंधी बीमारी का इलाज कराने पहुंचा था। उस अस्पताल में काम करनेवाली कुरूप के गांव की एक नर्स ने उसे पहचान लिया था। अस्पताल में उसने जोशी नाम से इलाज कराने की कोशिश की। पुलिस को इसकी सूचना मिलते ही जांच शुरू हुई थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह गायब हो गया था। इसके बाद रांची और धनबाद में भी उसके इलाज कराने की सूचनाएं पुलिस को मिलती रही हैं। अब इन सभी पुराने सुरागों को जोड़कर केरल क्राइम ब्रांच धनबाद, बोकारो और रांची के अस्पतालों में उसके इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की तलाश कर रही है।
पुलिस के लिए बना पहेली
जनवरी 1984 से फरार कुरूप अभी भी पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है। न उसकी गिरफ्तारी हो सकी और न ही उसकी मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है। यही वजह है कि केरल क्राइम ब्रांच अब उसके पुराने मेडिकल रिकॉर्ड को अहम सुराग मान रही है। देश के सबसे लंबे समय से फरार अपराधियों में शामिल कुरूप को पकड़ना केरल पुलिस के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मेडिकल रिकॉर्ड मिलना मुश्किल
एसएनएमएमसीएच में इतने पुराने मेडिकल रिकॉर्ड का मिलना मुश्किल है। अधिकारियों के अनुसार उस समय डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था नहीं थी। अस्पताल की कई बार शिफ्टिंग हुई है। ऐसे में बिना किसी निर्धारित तिथि के किसी मरीज का वर्षों पुराना मेडिकल रिकॉर्ड ढूंढ़ना काफी मुश्किल भरा काम है।
केरल क्राइम ब्रांच के अधिकारी पीसी जोशी अथवा पीएस जोशी नामक किसी व्यक्ति का मेडिकल रिकॉर्ड की तलाश कर रहे हैं। मामला काफी पुराना है। बावजूद रिकॉर्ड खोजने की कोशिश की जा रही है।
-डॉ डीके गिंदोरिया, अधीक्षक, एसएनएमएमसीएच


