DA Image
16 जनवरी, 2021|5:32|IST

अगली स्टोरी

सुप्रीम कोर्ट में बोली यूपी सरकार- केरल के पत्रकार की गिरफ्तारी में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

supreme court

उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 5 अक्टूबर को हाथरस के पास से केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की गिरफ्तारी और कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के साथ उसके कथित संबंधों की जांच के दौरान चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस ने बताया कि जिस अखबार में काम करने का दावा पत्रकार ने किया है वो तो तीन साल पहले बंद हो चुका है।

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) ने कप्पन की ओर से दायर हलफनामे पर जवाब देने के लिए समय की मांग की है, इसके अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यूपी सरकार की तरफ से कहा, "एक एसोसिएशन अपनी ओर से एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका कैसे लड़ सकता है ... वह (कप्पन) थेजस नामक एक पेपर के पत्रकार होने का दावा करता है जो तीन साल पहले बंद हो गया था। उसके खिलाफ अब तक की गई जांच चौंकाने वाली है।”

स्वतंत्र रूप से काम करने वाले पत्रकार सिद्दीकी कप्पन हाथरस के कथित गैंगरेप और मर्डर पर रिपोर्टिंग करने के लिए शहर जा रहे थे, उसी दौरान 5 अक्टूबर को यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। बता दें कि उनके साथ तीन और लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था। 7 अक्टूबर को पुलिस ने सभी के खिलाफ राजद्रोह और UAPA के सेक्शन 17 के तहत मामला दर्ज किया था.  इस सेक्शन के तहत आतंकी गतिविधि के लिए फंड जुटाने के मामले में सजा का प्रावधान है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की बेंच ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स KUWJ के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा और ऐसी कोई भी मिसाल लाने के लिए कहा, जहां एक एसोसिएशन या यूनियन ने एक आपराधिक मामले में जेल में बंद व्यक्ति की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की हो। सुप्रीम कोर्ट कप्पन की गिरफ्तारी देने वाली केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

सिब्बल ने अदालत से कहा कि वो मामले पर इसी अदालत में सुनवाई करेंगे और वे कप्पन की पत्नी को अपनी याचिका में एक पार्टी के रूप में जोड़ने के लिए सहमत हुए। पीठ ने जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम को भी शामिल करते हुए कहा, "भले ही आप पत्नी (कप्पन की पत्नी) को निकाल दें, फिर भी हम आपसे पूछेंगे कि आपको उच्च न्यायालय में क्यों नहीं जाना चाहिए।"
सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर सीधे हस्तक्षेप करने का उदाहरण दिया और इसे न्यायालय की एक मिसाल के रूप में उद्धृत किया, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संबंध था।

लेकिन पीठ ने यह कहते हुए उसे अलग कर दिया कि "प्रत्येक मामले के तथ्य अलग होते हैं।" पीठ ने मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए तैनात किया जिससे राज्य को केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की प्रतिक्रिया और पत्रकार संघ कोप्पन की पत्नी को कार्यवाही में शामिल होने का समय मिल सके।
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Keral Journalist UP government in the Supreme Court shocking information revealed in arrest UAPA Act