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5 जून, 2020|6:04|IST

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अलविदा केदारनाथ: 'मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, मेरी चलती हुई सांस', पढ़ें उनकी अन्य रचनाएं

अलविदा केदारनाथ: 'मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, मेरी चलती हुई सांस', पढ़ें उनकी अन्य रचनाएं
अलविदा केदारनाथ: 'मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, मेरी चलती हुई सांस', पढ़ें उनकी अन्य रचनाएं

प्रसिद्ध साहित्यकार और कवि केदारनाथ सिंह का आज निधन हो गया। केदारनाथ सिंह का निधन दिल्ली के एम्स अस्पताल में हुआ। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित थे। उन्हें 2013 में यह पुरस्कार मिला था। केदारनाथ सिंह यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के 10 वें लेखक थे।

यूपी के बलिया जिले में जन्में केदारनाथ सिंह जेएनयू में हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने हाथ, जाना, दिशा, बनारस आदि जैसी कई चर्चित रचनाएं लिखीं। यहां हम आपको साहित्यकार केदारनाथ सिंह की कुछ रचनाओं को बता रहे हैं। 

विद्रोह

आज घर में घुसा
तो वहाँ अजब दृश्य था
सुनिए — मेरे बिस्तर ने कहा
यह रहा मेरा इस्तीफ़ा
मैं अपने कपास के भीतर
वापस जाना चाहता हूँ

बनारस

इस शहर में वसंत
अचानक आता है
और जब आता है तो मैंने देखा है
लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ़ से
उठता है धूल का एक बवंडर
और इस महान पुराने शहर की जीभ
किरकिराने लगती है

पूंजी

सारा शहर छान डालने के बाद
मैं इस नतीजे पर पहुँचा
कि इस इतने बड़े शहर में
मेरी सबसे बड़ी पूँजी है
मेरी चलती हुई साँस
मेरी छाती में बंद मेरी छोटी-सी पूँजी
जिसे रोज मैं थोड़ा-थोड़ा
खर्च कर देता हूं

ये भी पढ़ें: नहीं रहे सुप्रसिद्ध साहित्यकार केदारनाथ सिंह

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ज्ञानपीठ पुरस्कार से हो चुके थे सम्मानित
ज्ञानपीठ पुरस्कार से हो चुके थे सम्मानित

दिशा

हिमालय किधर है?

मैंने उस बच्‍चे से पूछा जो स्‍कूल के बाहर

पतंग उड़ा रहा था

उधर-उधर-उसने कहाँ

जिधर उसकी पतंग भागी जा रही थी

मैं स्‍वीकार करूँ

मैंने पहली बार जाना

हिमालय किधर है?

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  • Web Title:kedarnath singh death read rachnayen and poems of kedarnath singh