KEDARNATH DISASTER cag report say In calamity uttarakhand govt officials poor implementation of reconstruction projects post 2013 calamity - KEDARNATH DISASTER: आपदा में अफसरों ने काटी चांदी, अपात्रों को पहुंचाया फायदा, 539 करोड़ रुपये की बंदरबाट DA Image
14 नबम्बर, 2019|1:55|IST

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KEDARNATH DISASTER: आपदा में अफसरों ने काटी चांदी, अपात्रों को पहुंचाया फायदा, 539 करोड़ रुपये की बंदरबाट

केदारनाथ त्रासदी(एचटी फाइल फोटो)

केदारनाथ आपदा के बाद राहत और पुनर्निर्माण की आड़ में सरकारी मशीनरी ने जमकर चांदी काटी। पुनर्निर्माण कार्यों के बीच अपात्र को भी फायदा पहुंचाया गया। चहेते ठेकेदारों को मनमाने ढंग से करोड़ों रुपये के काम बांटे गए। यही नहीं, उन कामों में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, जो कि मंजूर भी नहीं थे। करीब 539 करोड़ रुपये गैर मंजूर कामों और आपदा से इतर कामों में बांट दिए गए।

नियंत्रक एवं महालेखाकार की रिपोर्ट (कैग रिपेार्ट) में केदारनाथ आपदा के राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में की गई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। सरकार ने शुक्रवार को कैग रिपोर्ट को सदन में पेश कर दिया।  यह रिपोर्ट जनवरी 2014 से मार्च 2017 के बीच की अवधि की है। कैग ने केंद्र सरकार से कई योजनाओं में धन न मिलने का भी उल्लेख किया है।

केदारनाथ आपदा

15 से 17 जून 2013 के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अतिवृष्टि के कारण विनाशकारी आपदा आई थी। मंदाकिनी, अलकंदा, भागीरथी समेत अन्य नदियों में आई बाढ़ से बडे़ पैमाने पर जानमाल की हानि हुई। एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए। 5400 से ज्यादा लोग लापता हो गए। 70 हजार से ज्यादा तीर्थयात्रियों और एक लाख से ज्यादा स्थानीय लोगों इससे प्रभावित हुए थे।

केंद्र से मिला था स्पेशल पैकेज

इस आपदा से राज्य के पांच जिल में काफी प्रभावित हुए थे। इनमें राहत और पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार ने  9296.89 करोड़ रुपये का पैकेज मांगा था। केंद्र सरकार ने राज्य को वर्ष 2013-14 से वर्ष 2015-16 के बीच 6,259.84 करोड़ रुपये दिए थे।

जो काम मंजूर नहीं, उन पर लुटाए 243 करोड़ 

आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए मिले धन में अफसरों ने ऐसे काम भी करवा दिए जो जिनकी जरूरत ही नहीं थी।कैग रिपेार्ट के अनुसार  525 कामों में  119 मार्ग और 14 पुल आपदा से अप्रभावित क्षेत्रों में बनवाए गए। इन पर 90.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यही नहीं  37.99 करोड़ के स्वीक़ृत काम रदद कर मनमाने ढंग से 117 मार्ग और छह पुलों के लिए 72.05 करोड़ रुपये दे दिए गए। विभिन्न क्षेत्रों के निर्माण कार्यों के लिए बनाई गई डीपीआर में भी लापरवाही की गई। 98 विभिन्न योजनाओं की 5.81 करोड़ रुपये की डीपीआर मंजूर तक नहीं की गई। इसी प्रकार कई और कार्य भी ऐसे हैं, जिनमें विभागीय गलतियों के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लग गया।

294.64 करोड़ रुपये इधर से उधर किए

आपदा राहत के धन को सरकारी विभागों में मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया। रुद्रप्रयाग में 12 बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए 79.19 करोड़ दे दिए गए। यही नहीं, जिन कामों के लिए राज्य सेक्टर में पहले ही पेसा मंजूर हो चुका था, उन्हें आपदा के बजट से और पैसा दे दिया। गोविंदघाट में अप्रैल 2016 में राज्य सेक्टर से मंजूर एक पुल लिए 20.74 करोड़ रुपये और दे दिए। यूजेवीएनएल और पावर कापोर्रेशन को भी इसी प्रकार 35.92 करोड़ रुपये बांटे गए। खाद्य विभाग, वन विभाग, सिंचाई ओर पर्यटन विभाग, उड्डयन विभाग ने भी इसी प्रकार आपदा के बजट में जमकर सेंध लगाई।

सरकार पर लगवा दिया 19.88 करोड़ का ब्याज

राहत और निर्माण कार्यों में लेटलतीफी से से जहां पीड़ितों को समय पर राहत नहीं मिली। वहीं कुछ गैरजिम्मेदार अफसरों ने सरकार पर बेवजह से 19.88 करोड़ रुपये का ब्याज लगवा दिया। दरअसल आपदा प्रबंधन के लिए विश्व बैंक से मिले 1100 करोड़ रुपये में 274.29 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं हो पाया था। यह पैसा अफसरों ने लौटाने के बजाए बैंकों में यूं ही पड़े रहने दिया। 1100 करोड के कर्ज में 373.50 करोउ रुपये बिना इस्तेमाल रखे रहे। इस धन की एवज में सरकार पर ब्याज के रूप में 19.88 करोड़ रुपये की देनदारी बन गई।

न पुरोहितों के घर बने और पुल भी अधूरे

आपदा की वजह से केदारनाथ में पुराहितों के घर भी तबाह हो गए थे। पुनर्निर्माण कार्य के तहत यहां 38.63 करोड़ रुपये की लागत से 113 घर बनाए जाने थे। कैग ने पाया कि यहां नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने 113 में से केवल 40 घर ही बनाए। बाकी मकान नहीं बनाए गए। पुरोहितों के आवास मंजूर होने के दो साल बाद भी किसी भी मकान का निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। केदारनाथ धाम में आवाजाही के लिए तीन पुल भी मंजूर किए गए थे। इनमें भी केवल एक ही पुल अस्तित्व में आ पाया। बाकी दो पुल अब तक तैयार नहीं हुए।

उड्डयन विभाग ने हवाई योजनाएं बनाईं

आपदा राहत और बचाव कार्यों को त्वरित गति से अंजाम देने के लिए उड्डयन विभाग की योजनाएं भी हवा-हवाई साबित हुई। यही हाल पर्यटन विभाग की योजनाओं का भी रहा। अफसरों ने जोरशोर से योजनाएं तो जरूर बनाई, पर जब उन्हें पर काम करने की बात आई तो आंखे मूंद ली। कैग रिपेार्ट के अनुसार आपदा के बाद सरकार ने राज्य के आपदा प्रबंधन, राहत और बचाव नेटवर्क को मजबूत बनाने पर जोर दिया था। इसके तहत राज्य में पांच हेलीड्रोम्स, 19 हेलीपोर्ट्स ओर 34 हेलीपैड बनाए जाने थे। इसके साथ ही 3500 क्षमता के 37 मल्टीपरपज हॉल बनाने की योजना भी थी। पर, न तो हेलीड्रोम्स पर सरकार आगे बढ़ी और न ही हेलीपोर्ट्स पर। हेलीपैड भी केवल 26 ही बने। सात हेलीपैड को जमीन उपलब्ध न होने के नाम पर निरस्त कर दिया गया। रुद्रप्रयाग के सोनप्रयाग में 65 करोड़ रुपये की लागत से बहुउद्देश्यीय हॉल मंजूर किया था, लेकिन स्वीकृति के चार साल बाद भी वह नहीं बना। लापरवाही का यह आलम पर्यटन विभाग के पर्यटक आवास गृहों में भी साफ दिखाई दिया। इनमें हट और कॉटेज का काम समय पर पूरा नहीं किया जा सका।

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