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अलकायदा की धमकी दरकिनार कर कश्मीरी युवा सेना भर्ती में उमड़े

आतंकवादी संगठन अलकायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी की धमकी को दरकिनार कर बुधवार को जम्मू-कश्मीर में सेना भर्ती के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय युवा पहुंचे। इससे पहले जवाहिरी ने वीडियो मैसेज में कश्मीर मुजाहिद्दीनों से भारतीय सेना और सरकार निरंतर हमला करने को कहा था। 

धमकी और बारिश के बावजूद बारामूला में सेना में शामिल होने के लिए बुधवार को 5500 कश्मीरी युवा पहुंचे। सेना का यह भर्ती अभियान 16 जुलाई तक चलेगा। सेना में शामिल होने आए एक युवा ने कहा कि मैं सभी का आह्वान करूंगा कि वे भारतीय सेना में शामिल हों। हालांकि सेना में शामिल होने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्द्धा है, फिर भी मैं लोगों का आह्वान करुंगा कि वे आएं  और इससे जुड़े। एक अन्य युवा ने कहा कि उसका हमेशा से ही सपना रहा है कि वह भारतीय सेना में शामिल हो।  

वहीं अलकायदा के मीडिया विंग अल शबाब की ओर से जीरी वीडियो संदेश का शीर्षक है, ‘कश्मीर को न भूलें’। सफेद पगड़ी और कुरता पहने जवाहिरी ने इस वीडियो में कहा है कि मेरा मानना है कि कश्मीर में मौजूद मुजाहिदीन को फिलहाल भारतीय सेना और सरकार को लगातार चोट पहुंचाने पर ही पूरा ध्यान देना चाहिए।  इससे भारत की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा। जवाहिरी के इस भाषण के दौरान स्क्रीन पर कश्मीर में हाल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए जाकिर मूसा का फोटो भी दिखा। मूसा भारत में अल कायदा की शाखा अंसार गजवातुल हिंद का प्रमुख था। जवाहिरी ने यह भी बताया कि पाकिस्तान कश्मीर में सीमापार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा दे रहा है।

पाक सेना और सरकार को अमेरिका का चापलूस बताया

जवाहिरी ने पाकिस्तान की सेना और सरकार को अमेरिका का चापलूस कहा है। जवाहिरी ने कहा कि जब अफगानिस्तान से रूसियों को निकालने के बाद अरब मुजाहिदीन कश्मीर की तरफ बढ़ने वाले थे तो पाकिस्तान ने उन्हें रोक दिया। एक तरफ राइफल और एक तरफ कुरान के साथ, जवाहिरी ने कश्मीर पर पाकिस्तान की नीति की तुलना तालिबान और प्रवासी आतंकवादियों से की। जवाहिरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना और सरकार केवल मुजाहिद्दीनों का विशेष राजनीतिक इस्तेमाल करने में रुचि रखती है। बाद में उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है या फिर उन पर अत्याचार करती है। 

कश्मीर में लड़ाई अलग संघर्ष नहीं

अलकायदा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि कश्मीर में लड़ाई अलग संघर्ष नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय द्वारा विभिन्न ताकतों के खिलाफ चलाए जा रहे जिहाद का हिस्सा है। जवाहिरी ने कहा कि आतंकी कश्मीर में मस्जिदों, बाजारों और जहां मुस्लिम इकट्ठा हों, उसे नुकसान न पहुंचाएं।  

जवाहिरी पर 1.7 अरब का इनाम

पेशे से डॉक्टर, मिस्र के इस्लामिक जिहाद नाम के चरमपंथी संगठन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला अयमान अल-जवाहिरी को अलकायदा में ओसामा बिन लादेन का दाहिना हाथ कहा जाता था। जो ओसामा की मौत के बाद अलकायदा की कमान भी संभाल रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना हैं कि 11 सितम्बर 2001 को न्यूयॉर्क में हुए हमलों के पीछे अल जवाहिरी का ही दिमाग काम कर रहा था। अमेरिका ने वर्ष 2001 में जिन 22 सर्वाधिक वांछित चरमपंथियों की सूची जारी की थी उनमें ओसामा बिन लादेन के बाद जवाहिरी दूसरे नंबर पर था। अमेरिकी ने जवाहिरी पर 1.71 अरब रुपये का इनाम रखा है। जवाहिरी को आखिरी बार अक्तूबर 2001 में अफगानिस्तान के खोस्त शहर में देखा गया था। अफगानिस्तान से तालिबान की सत्ता खत्म होने के बाद से वह भूमिगत है। 

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  • Web Title:Kashmiri youth snub jihad turn up in large numbers to join Indian Army