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6 अगस्त, 2020|12:09|IST

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समान अधिकार: वक्त बदला है तो रिवाज क्यों नहीं?

samanadhikaar

भारतीय परंपरा में विवाह का पवित्र रिश्ता सात जन्मों का अटूट बंधन माना जाता है। विवाह मंडप में सात फेरे लेने के बाद पति-पत्नी शादी के अटूट बंधन में बंध जाते हैं। शादी के दौरान जब वर वधू सात फेरे लेते हैं तो हर फेरे के साथ एक वचन जुड़ा होता है। वचन स्वीकारने के बाद ही कन्या का हाथ वर के हाथों में सौंपा जाता है। अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू जीवनभर एक दूसरे का हर सुख-दुख में साथ निभाने का वचन देते हैं। लेकिन अगर असल जीवन की बात की जाएं तो क्या पति पत्नी के बीच ये सात फेरे काफी है? आज के चुनौती भरे दौर में वो सात फेरे कितने सार्थक साबित हो रहे हैं? अब बात बराबरी की होनी चाहिए। सवाल यह है कि जब वक्त बदला है तो रिवाज क्यों नहीं। आपका अपना अखबार 'हिन्दुस्तान' इस दिशा में एक खास पहल करने जा रहा है। इंतजार करिए 11 अक्टूबर का। विस्तार से जानने के लिए पढ़ते रहें livehindustan.com 

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  • Web Title:karwa chauth 2019: lets talk on equal rights for men and women Gender equality