‘वर्दी पहन रखी है इसलिए नागरिकों की स्वतंत्रता को हल्के में नहीं ले सकते’
कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू जनजागृति समिति के संयोजक मोहन गौड़ा को बेंगलुरु लाने के मामले में वाइटफील्ड पुलिस को फटकार लगाई। जज ने नागरिकों की स्वतंत्रता को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज न होने और रात करीब दो बजे की शिकायत पर भी नाराजगी जताई गई।

- हिंदू संगठन के नेता को बेंगलुरु लाने पर हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकारा
पुलिस के कार्यों पर नाराजगी
बेंगलुरु, एजेंसी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू जनजागृति समिति के संयोजक मोहन गौड़ा को पूछताछ के लिए उडुपी से बेंगलुरु लाने के मामले में वाइटफील्ड पुलिस के कामकाज पर शनिवार को कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सवाल किया कि जब गौड़ा को नोटिस देकर तीन दिन बाद पुलिस के सामने पेश होने के लिए कहा गया था तो उन्हें बेंगलुरु लाने की क्या जरूरत थी। जज ने कहा, ‘आप सिर्फ इसलिए नागरिकों की स्वतंत्रता को हल्के में नहीं ले सकते क्योंकि आपने वर्दी पहन रखी है।’
सीसीटीवी फुटेज की कमी
अदालत ने पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने पर भी सवाल उठाए। पुलिस की ओर से बताया गया कि बिजली के कारण सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा था। इस पर जज ने कहा कि वाइटफील्ड पुलिस स्टेशन का नाम बदलकर 'डार्कफील्ड पुलिस स्टेशन' कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘आप अंधेरे में काम करते हैं? आपकी गतिविधियां भी अंधेरे में हो सकती हैं।’
मोहन गौड़ा का बयान
मोहन गौड़ा ने कुणाल कामरा का बेंगलुरु शो रद्द होने पर बयान दिया था। पुलिस ने उनके पोस्ट को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया था। जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि कोई व्यक्ति दूसरों की नजरों से बच सकता है, लेकिन अदालत की नजरों से नहीं बच सकता। उन्होंने टिप्पणी की कि अब पुलिस को खुद नियंत्रित करने की जरूरत पड़ रही है।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
पूछा- कौन अपनी इच्छा से थाने आएगा
अदालत ने पुलिस से पूछा कि रात करीब दो बजे एक पुलिस कांस्टेबल ने शिकायत कैसे दर्ज की और उसके बाद पुलिसकर्मी उडुपी कैसे पहुंच गए। आपको कौन निर्देश दे रहा था? डीसीपी ने अदालत को बताया कि गौड़ा अपनी कार से आए थे और खुद आने के लिए तैयार हुए थे। इस पर जज ने सवाल किया, ‘कौन अपनी इच्छा से पुलिस स्टेशन आएगा? क्या पुलिस स्टेशन कोई पवित्र स्थान है?’


