फीडबैक में जिला साबित रहा फिसड्डी, दो रैंक गिरी
आईजीआरएस के फीडबैक में एक बार फिर से जिला फिसड्डी साबित हुआ। संतोषजनक फीडबैक का प्रतिशत सिर्फ 46.49 फीसदी ही है।

कानपुर। आईजीआरएस के फीडबैक में एक बार फिर से जिला फिसड्डी साबित हुआ। जिले की आईजीआरएस रैंक यूपी में 68 स्थान से बढ़कर सितंबर महीने में 70वें स्थान पर पहुंच गई। अफसरों के शिकायत निस्तारण में शहरवासी संतुष्ट से ज्यादा असंतुष्ट है। जिले को 140 में से 113 नंबर हासिल हुए। डीएम के अल्टीमेटम और कार्रवाई के बावजूद रैंक सुधरने का नाम नहीं ले रही है। लगातार जिले की आईजीआरएस रैंक खराब हो रही है। आईजीआरएस रैंक सुधारने के लिए महीने भर मीटिंगों का दौर, वीडियो कांफ्रेंसिंग में कर्मचारियों को फटकार लगाने के बावजूद रिजल्ट जीरो ही मिल रहा। सितंबर महीने की रैंक में सीएम कार्यालय से 8429 लोगों से शिकायत निस्तारण का फीडबैक लिया गया।
इसमें 4510 शिकायतकर्ता शिकायत निस्तारण से असंतुष्ट है। सिर्फ 3919 शिकायतकर्ता ही शिकायत हल होने से संतुष्ट है। संतोषजनक फीडबैक का प्रतिशत सिर्फ 46.49 फीसदी ही है। इसी तरह से महीने के आखिरी में 284 शिकायतें डिफॉल्ट श्रेणी में रही। लिए गए 8429 फीडबैक में से संबंधित विभाग के अफसरों ने 5981 शिकायकर्ताओं से ही सिर्फ संपर्क किया। बाकी 2448 शिकायतें बिना आवेदक से संपर्क किए हुए ही निस्तारित कर दी गई। एडीएम सिटी आलोक गुप्ता ने बताया कि जिले की रैंक गिरी है। इसके लिए दोषी विभागों का रिव्यु कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। निगेटिव फीडबैक वाले एक-एक मामलों का रिव्यु होगा।आईजीआरएस रैंक खराब होने पर अगस्त महीने में प्रशासनिक अफसरों ने पांच अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उनके खिलाफ शासन को लिखा था। सीएमओ हरिदत्त नेमी, अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण मुकेश चक, बीएसए हरिओम सिंह, कृषि उपनिदेशक आरएस वर्मा, अधिशासी अभियन्ता दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड राजकुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। इन सभी अफसरों के विभाग में अप्रैल, मई, जून और जुलाई के फीडबैक सबसे खराब रहे थे। इसके बावजूद कोई खास फर्क नहीं पड़ा। फिर निगेटिव फीडबैक की वजह से जिले की रैंक खराब हुई।


