आटा गांव के पास एक्सप्रेस-वे की नाली का बेस बहा, प्लेटफॉर्म टूटे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में, आटा गांव के पास 50 मीटर का हिस्सा धंस गया है और सीमेंटेड प्लेटफॉर्म के पत्थर भी टूट गए हैं। निर्माण में गुणवत्ता की विफलता और लगातार मिट्टी बहने की घटनाओं ने समस्याएँ उत्पन्न की हैं।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के रोजाना रोजाना धंसने और टूटने से इसके निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। रविवार को किलोमीटर 69.9 पर आटा गांव के पास एक्सप्रेसवे की सड़क से सटकर बनाई गई नाली के नीचे की मिट्टी बहने से लगभग 50 मीटर का हिस्सा धंस गया है, जिससे नाली हवा में लटकी नजर आ रही है। पास ही बने सीमेंटेड प्लेटफॉर्म के पत्थर भी तीन स्थानों पर टूट गए हैं। बताया जाता है कि नीचे की मिट्टी के धंसने से यह पत्थर भी टूट कर बह गए। शनिवार रात हल्की बारिश के बीच किमी 69.9 से 70 किमी तक करीब 50 मीटर तक साइड लेन से सटी बनी नाली के नीचे की मिट्टी बह गई है। यहां की स्थिति भी ठीक उसी प्रकार नजर आ रही है जिन प्रकार शनिवार को बंदूखेड़ा गांव के पास सड़क के नीचे की मिट्टी बही थी। नाली के नीचे मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा बहने से यहां पर नाली हवा में लटकी नजर आ रही है। यदि दोबारा बारिश होती है तो नाली के साथ साइड लेन के बहने का भी खतरा बना हुआ है। बता दें कि शनिवार को भी इसी लेन में किलोमीटर 69.8 पर बंदूखेड़ा गांव के पास सड़क के नीचे से लगभग 50 मीटर मिट्टी बह गई थी, जिससे क्रैश बैरियर के नीचे 10 फीट गहरा गैप बन गया था। सड़क का यह हिस्सा हवा में लटका हुआ था。
पुल के ऊपर दो दिन पहले बनी सड़क फिर दबी
कानपुर-लखनऊ लेन पर किमी 65.7 पर उन्नाव-लालगंज मार्ग स्थित पुल के ऊपर दो दिन पहले मरम्मत की गई 40 मीटर सड़क दोबारा दब गई है और गिट्टी उखड़ने लगी है। इससे पहले शुक्रवार रात भी किलोमीटर 67 से 68 के बीच भगवतपुर गांव के सामने 500 मीटर सड़क दबी थी, जिसे रातों-रात ठीक किया गया था। इस लेन में हर दिन ऐसा ही हाल नजर आ रहा है। वहीं, किलोमीटर 63.7 (बेहटा गांव) के पास भी 100 मीटर हिस्से पर नया तारकोल बिछाकर पीएनसी के कर्मियों द्वारा सफेद पट्टी बनाने का काम चलता मिला, जिससे लग रहा है कि यह सड़क भी शनिवार की रात को उखड़ी होगी।
एलिवेटेड हिस्से की सड़क खोल रही पोल
अब तक एक्सप्रेस-वे के 42 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हिस्से में ही सड़क धंसने और मिट्टी बहने की शिकायतें आ रही थीं, जिस पर एनएचएआई ड्रेनेज सिस्टम की कमी बताकर सफाई दे रहा था। हालांकि, अब लखनऊ क्षेत्र के एलिवेटेड हिस्से पर भी तारकोल उखड़ने और गड्ढे बनने लगे हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।


