महावीर ने त्याग व वैराग का पाठ पढ़ाया
हिन्दुस्तान, कानपुर
कानपुर के श्री धर्मनाथ जैन कांच के मंदिर में चातुर्मास के दौरान पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस पर मुनि डॉ. संयम रत्न विजय और मुनि भुवन रत्न विजय ने कल्पसूत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा की महानता जन्म और जाति से नहीं, बल्कि कर्म से होती है और महावीर ने त्याग और वैराग का महत्व समझाया।

कानपुर। श्री धर्मनाथ जैन कांच का मंदिर, जैन भवन में चल रहे चातुर्मास के दौरान पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस शुक्रवार को मुनि डॉ.संयम रत्न विजय और मुनि भुवन रत्न विजय ने कल्पसूत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा कि जन्म व जाति से कोई महान नहीं होता अपितु कर्म से महान होता है। महावीर ने जगत को त्याग व वैराग का पाठ पढाया। घर छोड़ने वाला त्यागी पर घर को भीतर से निकालने वाला वैरागी होता है। महावीर सबके थे और सब महावीर के थे। महावीर की दृष्टि में अपना-पराया जैसा कोई भेद नहीं था। परमात्मा महावीर का जन्म समस्त जीवों के कल्याण के लिए हुआ था।
कल्पसूत्र कल्पवृक्ष की तरह हमारे मनोवांछित को पूर्ण करता है।


