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29 दिसंबर, 2020|3:10|IST

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कन्हैया, शेहला और उमर के साथ हो रहा दुश्मनों जैसा व्यवहार, नापसंद व्यक्ति को बताया जा रहा आतंकी: नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने देश में चर्चा और असहमति की गुंजाइश कम होते जाने को लेकर रोष प्रकट किया है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि मनमाने तरीके से राजद्रोह के आरोप थोप कर लोगों को बगैर मुकदमे के जेल भेजा जा रहा है। हालांकि, अक्सर ही सेन की आलोचना के केंद्र में रहने वाली भाजपा ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है। प्रख्यात अर्थशास्त्री ने इस बात पर दुख जताया कि कन्हैया कुमार, शेहला राशिद और उमर खालिद जैसे युवा कार्यकर्ताओं के साथ अक्सर दुश्मनों जैसा व्यवहार किया गया है। उन्होंने दावा किया, 'शांतिपूर्ण एवं अहिंसक तरीकों का इस्तेमाल करने वाले कन्हैया या खालिद या शेहला जैसी युवा एवं दूरदृष्टि रखने वाले नेताओं के साथ राजनीतिक संपत्ति की तरह व्यवहार करने के बजाय उनके साथ दमन योग्य दुश्मनों जैसा बर्ताव किया जा रहा है। जबकि उन्हें गरीबों के हितों के प्रति उनकी कोशिशों को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने का अवसर दिया जाना चाहिए था।'

'तीनों कृषि कानूनों की समीक्षा होनी चाहिए'
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सेन (87) ने ईमेल के जरिए दिए एक साक्षात्कार में केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा, 'निश्चित तौर पर इन कानूनों की समीक्षा करने के लिए एक मजबूत आधार है। लेकिन पहली जरूरत यह है कि उपयुक्त चर्चा की जाए, न कि कथित तौर पर बड़ी रियायत देने की बात कही जाए, जो असल में बहुत छोटी रियायत होगी।' दिल्ली से लगी सीमाओं पर पिछले करीब एक महीने से नए कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसानों के प्रदर्शन करने के मद्देनजर सेन ने यह टिप्पणी की है।

नापसंद व्यक्ति को आतंकी बताकर जेल भेजा जा सकता है
भाजपा नीत सरकार को लेकर पूछे जाने पर प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, 'जब सरकार गलती करती है तो उससे लोगों को नुकसान होता है। इस बारे में न सिर्फ बोलने की इजाजत होनी चाहिए, बल्कि यह वास्तव में जरूरी है। लोकतंत्र इसकी मांग करता है!' उन्होंने कहा, 'कोई व्यक्ति जो सरकार को पसंद नहीं आ रहा है, उसे सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित किया जा सकता है और जेल भेजा जा सकता है। लोगों के प्रदर्शन के कई अवसर और मुक्त चर्चा सीमित कर दी गई है या बंद कर दी गई है।'

वंचित समुदायों के साथ व्यवहार में बड़ा अंतर मौजूद
सेन ने यह भी कहा कि भारत में वंचित समुदायों के साथ व्यवहार में बड़ा अंतर मौजूद है। उन्होंने कहा कि शायद सबसे बड़ी खामी, नीतियों का घालमेल है, जिसके चलते बाल कुपोषण का इतना भयावह विस्तार हुआ है। इसके उलट हमें विभिन्न मोर्चों पर अलग-अलग नीतियों की जरूरत है।

सामाजिक दूरी सही, लॉकडाउन थोपना गलत था
कोविड-19 महामारी से लड़ने की देश की कोशिशों पर सेन ने कहा कि भारत सामाजिक मेलजोल से दूरी रखने की जरूरत के मामले में सही था, लेकिन बगैर किसी नोटिस के लॉकडाउन थोपा जाना गलत था। उन्होंने कहा, 'आजीविका के लिए गरीब श्रमिकों की जरूरत को नजरअंदाज करना भी गलती थी। उन्होंने मार्च के अंत में लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद करोड़ों लोगों के बेरोजगार हो जाने और प्रवासी श्रमिकों के बड़ी तादाद में घर लौटने का जिक्र करते हुए यह कहा। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के बाद शायद पहली बार इतनी संख्या में लोगों ने पलायन किया।

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  • Web Title:Kanhaiya Shehla and Umar Khalid being treated like enemies says Nobel laureate Amartya Sen