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 फ्लोर टेस्ट से पहले कमलनाथ सरकार का राज्य के कर्मचारियों को तोहफा, महंगाई भत्ता बढ़ाया

फ्लोर टेस्ट से पहले कमलनाथ सरकार का राज्य के कर्मचारियों को तोहफा, महंगाई भत्ता बढ़ाया

संक्षेप:

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने सोमवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले कई कैबिनेट के फैसले लिए है जिसमें कोरोना से जुड़े भी फैसले भी शामिल है। कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए मंत्री पीसी...

Mar 15, 2020 03:22 pm ISTArun Binjola लाइव हिन्दुस्तान टीम, भोपाल
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मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने सोमवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले कई कैबिनेट के फैसले लिए है जिसमें कोरोना से जुड़े भी फैसले भी शामिल है। कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जुलाई 2019 से बढ़ाया गया है। इसके मुताबिक सातवें वेतन आयोग का लाभ पाने वाले कर्मचारियों को 12 से 17 फीसदी का महंगाई भत्ता मिलेगा और छठे वेतन आयोग लाभ ले रहे कर्मचारियों को दस फीसदी का महंगाई भत्ता मिलेगा। 

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मध्य प्रदेश मंत्री ने बताया कि रेत नियमों में भी संशोधन किया गया है। पहले निविदा देने की तीन दिन की अवधि होती थी उसे बढ़ाकर 15 दिन किया गया है। उन्होंने कहा है कि कोरोना की वजह से सत्र होगा या नहीं इसका फैसला कैबिनेट की बैठक में नहीं लिया जा सकता है। इसका फैसला सोमवार को विधानसभा में ही लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कैबिनेट की बैठक में चर्चा की गई कि हमारे विधायक जो जयपुर से आए हैं, उनका कोरोना टेस्ट किया जाना चाहिए। हरियाणा और बेंगलुरु में रहने वाले विधायकों का भी मेडिकल टेस्ट होना चाहिए।

20 से ज्यादा लोगों के इक्ट्ठा होने पर लगाई रोक
पीसी शर्मा ने बताया कि मध्य प्रदेश में 700 विदेशियों की एंट्री हुई है और मजिस्ट्रेट व सीएमओ को इससे निपटने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में स्कूल, कॉलेज, सिनेमा हॉल, स्वीमिंग पूल सब बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। इतना ही नहीं 20 से ज्यादा लोग किसी जगह कार्यक्रम में शामिल होने पर भी रोक लगा दी गई है। 9312 लोगों की एयरपोर्ट पर स्कैनिंग की गई है। उन्होंने बताया कि आदिवासी नेता रामू टेकाम जो बैतूल से लोकसभा का चुनाव लड़े थे उनको स्टेट पीएसी का सदस्य बनाया गया है। 

कांग्रेस के बागी विधायकों ने केंद्रीय बलों की सुरक्षा मांगी

मध्य प्रदेश कांग्रेस के बागी विधायकों ने वीडियो जारी कर अपनी सुरक्षा में केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने की मांग की है। बेंगलुरू में मौजूद कई बागी विधायकों ने वीडियो संदेश जारी कर विधानसभा अध्यक्ष से यह अनुरोध किया है। कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे दबाव में जारी किए जाने की बात कही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक कांग्रेस के बागी 22 विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से छह विधायकों का इस्तीफा विधानसभाध्यक्ष एन.पी. प्रजापति ने मंजूर कर लिया है। बेंगलुरू में मौजूद विधायकों ने रविवार को वीडियो संदेश जारी कर सुरक्षा की मांग की है।

वीडियो संदेश में विधायकों ने कहा है, “विधानसभा अध्यक्ष ने हमें उपस्थित होने का नोटिस दिया है। हमें जानकारी मिली है, लेकिन हम अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। भोपाल आने पर सुरक्षा को लेकर संशय है। इसलिए जरूरी है कि हमारी सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद ली जाए।”

कांग्रेस प्रवक्ता और मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष सैयद जाफर ने कहा, “विधायकों से यह वीडियो दबाव में बनवाए गए हैं। जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें विधायक के साथ दूसरे व्यक्ति की फुसफुसाती आवाज बताती है कि ये वीडिया सिखा-पढ़ाकर बनाए गए हैं।” 

गौरतलब है कि गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया के अलावा विधायक हरदीप सिंह डंग, जसपाल सिंह जज्जी, राजवर्धन सिंह, ओपीएस भदौरिया, मुन्ना लाल गोयल, रघुराज सिंह कंसाना, कमलेश जाटव, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, गिरराज दंडौतिया, रक्षा संतराम सिरौनिया, रणवीर जाटव, जसवंत जाटव ने इस्तीफे दे दिए हैं। विधानसभा अध्यक्ष एन.पी. प्रजापित ने इनमें से छह विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं।