कैलाश वानखेड़े के उपन्यास उजला अंधेरा को मिलेगा अयोध्या प्रसाद खत्री सम्मान
कैलाश वानखेड़े के उपन्यास 'उजला अंधेरा' को 2026 का 17वां अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान दिया जाएगा। यह निर्णय आलोचक आशुतोष कुमार द्वारा लिया गया है। उपन्यास दलित समुदाय की पीड़ा तथा भारतीय समाज की संरचना की समीक्षा करता है। सम्मान समारोह का आयोजन नवंबर में होगा।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। इंदौर-मध्यप्रदेश निवासी कैलाश वानखेड़े के उपन्यास 'उजला अंधेरा' को वर्ष 2026 का 17वां अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान दिया जाएगा। यह निर्णय मंगलवार को अयोध्या प्रसाद खत्री सम्मान समारोह समिति ने लिया।सम्मान के लिए इस उपन्यास का चयन आलोचक आशुतोष कुमार (संपादक, आलोचना) ने किया है। डी. वीरेन नंदा ने कहा कि उनका यह उपन्यास महज दलित समुदाय की पीड़ा का आख्यान नहीं, बल्कि भारतीय समाज की संरचना और उसकी अंतर्विरोधी विकास यात्रा की व्यापक समीक्षा भी है। इस उपन्यास की विशेषता है कि वंचना को केवल करुणा का विषय न बनाकर मनुष्य के स्वप्न, संघर्ष और गरिमा के प्रश्न से जोड़ा गया है।
'उजाले' और 'अंधेरे' का द्वंद्व इसीलिए केवल अभाव और सुविधा का द्वंद्व नहीं, बल्कि उस समाज के विवेक का प्रश्न भी बन जाता है, जिसे हम आधुनिक और लोकतांत्रिक समाज कहते हैं। कैलाश वानखेड़े ने अपने लेखन में हाशिए के जीवन को उसकी सामाजिक, ऐतिहासिक और मानवीय जटिलताओं के साथ देखने की एक विशिष्ट दृष्टि विकसित की है। उनकी रचनात्मकता अनुभव की प्रामाणिकता के साथ सामाजिक संरचनाओं की आलोचनात्मक समझ को जोड़ती है। इसी दृष्टि का सशक्त रूप उनके इस पहले उपन्यास में सामने आता है। फिलहाल वे मध्यप्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत हैं। उन्हें यह सम्मान नवंबर में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदान किया जाएगा।


