Kailash Mansarovar Yatra: 275 pilgrims were rescued 675 people were evacuated from Hilsa to Simikot - कैलाश मानसरोवर यात्राः 275 तीर्थयात्री बचाए गए, 3 दिनों में 675 लोगों को हिल्सा से सिमिकोट पहुंचाया गया DA Image
18 नबम्बर, 2019|9:40|IST

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कैलाश मानसरोवर यात्राः 275 तीर्थयात्री बचाए गए, 3 दिनों में 675 लोगों को हिल्सा से सिमिकोट पहुंचाया गया 

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कैलास मानसरोवर यात्रा से लौटने के दौरान खराब मौसम के कारण नेपाल के पहाड़ी इलाके हिल्सा में फंसे 275 और तीर्थयात्रियों को गुरुवार को निकाला गया। हेलीकॉप्टर लगातार फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। इससे पहले बुधवार को हिल्सा से 250 तीर्थयात्रियों को निकाला गया।

 

भारतीय दूतावास ने बताया कि फंसे लोगों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। बीते तीन दिनों में करीब 675 लोगों को हिल्सा से सिमिकोट पहुंचाया गया है। हिल्सा में आधारभूत सुविधाएं नहीं है जबकि सिमीकोट में यात्रियों को उतारने, संचार और चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। दूतावास के अधिकारियों के मुताबिक, 53 उड़ानों का संचालन किया गया और सेना व एमआई-16 के हेलीकॉप्टर समेत अन्य हेलीकॉप्टरों ने 142 फेरे लगाए। एक फेरे में अतिरिक्त 20-25 श्रद्धालुओं को निकालने के लिए निजी एमआई-16 हेलीकॉप्टर भी सेवा में लगाया गया है।

 दूतावास ने कहा कि पिछले तीन दिनों में फंसे हुए 883 तीर्थयात्रियों को सिमिकोट से नेपालगंज और सुरखेत पहुंचाया गया है। मौसम में सुधार के साथ ही गुरुवार दोपहर को दूतावास ने 26 उड़ानों का संचालन किया और नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर ने एक फेरा लगाया और 389 श्रद्धालुओं को सुरखेत और नेपालगंज पहुंचाया। दूतावास सभी श्रद्धालुओं को सड़क रास्ते से सुरखेत से नेपालगंज पहुंचाने के लिए सात बसें चला रहा है। खराब मौसम के कारण सोमवार तक जिले में विमानों का आवागमन बाधित हो गया था।
 
श्रद्धालुओं को विदेश मंत्रालय ने परामर्श जारी किया 
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने नेपाल के जरिए कैलास मानसरोवर यात्रा पर जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए एक परामर्श जारी कर कहा कि खराब मौसम की स्थिति में मार्ग में कई जगह फंसने की आशंका है। परामर्श में कहा गया है कि यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान रखना चाहिए कि नेपाल में सिमिकोट और हिल्सा बाकी दुनिया से केवल छोटे विमानों और हेलिकॉप्टर के जरिए हवाई मार्ग से ही जुड़े हैं। 

परामर्श के मुताबिक, दुर्गम और खतरनाक घाटी होने के कारण इन छोटे विमानों और हेलीकॉप्टरों का परिचालन तब हो पाता है जब इन स्थानों और पास के इलाके में मौसम पूरी तरह साफ हो। परामर्श में कहा गया है कि सिमिकोट और हिल्सा में आधारभूत संरचनाओं जैसे कि चिकित्सा सुविधाओं तथा ठहरने के लिए आरामदायक ठिकाने की घोर कमी है इसलिए श्रद्धालुओं को यात्रा शुरू करने के पहले खुद चिकित्सा जांच करानी चाहिए और करीब एक महीने तक की दवा साथ में रख लेनी चाहिए।
       


 

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