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सोनिया गांधी को भेजे इस्तीफे में सिंधिया ने कहा- कांग्रेस में रहते हुए मेरे लिए देश की सेवा करना संभव नहीं रह गया

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Himanshu
Tue, 10 Mar 2020 01:15 PM
सोनिया गांधी को भेजे इस्तीफे में सिंधिया ने कहा- कांग्रेस में रहते हुए मेरे लिए देश की सेवा करना संभव नहीं रह गया

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मुलाकात के बाद सिंधिया ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस्तीफा भेजा। इस्तीफा पत्र पर तिथि नौ मार्च की है। उन्होंने अपने स्टाफ के जरिए चिट्ठी भेजी।

अपने इस्तीफा में उन्होंने कहा, 'अपने राज्य और देश के लोगों की सेवा करना मेरा हमेशा से मकसद रहा है। मैं इस पार्टी में रहकर अब यह करने में अक्षम हूं।'

ज्योतिरादित्य सिंधिया का इस्तीफा:

18 साल तक कांग्रेस का सदस्य रहने के बाद अब मेरे लिए यह समय कांग्रेस छोड़ने का है। मैं अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं। आप यह बखूबी जानती हैं कि मेरे लिए यह स्थिति एक साल से अधिक समय से बन रही थी।

मेरा मकसद राज्य और देश की सेवा करना रहा है। मेरे लिए कांग्रेस में रहते हुए यह करना संभव नहीं रह गया था। मैंने अपने लोगों और कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं को देखते हुए यह महसूस किया कि यह सबसे अच्छा समय है कि मैं अब एक नई शुरूआत के साथ आगे बढूं।

मैं आपको और कांग्रेस पार्टी के मेरे सभी सहयोगियों को धन्यवाद देता हूं कि मुझे देश की सेना करने के लिए एक प्लेटफॉर्म दिया।

कांग्रेस पार्टी से इस्तीफे के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने की संभावना है। उनके कांग्रेस छोड़ने से अब मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर संकट गहरा गया है।

प्रदेश सरकार में कांग्रेस के कई मंत्रियों सहित 20 से अधिक विधायकों के बेंगलुरु जाने की खबर हैं। इन विधायकों के कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का समर्थक बताया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि सिंधिया के बाद ये विधायक भी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जायेगी।

मध्य प्रदेश में यह राजनीतिक स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। सिंधिया समर्थक विधायकों का कहना है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपनी अनदेखी से क्षुब्ध हैं।

विधानसभा का समीकरण
मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीट हैं। दो विधायकों का निधन हो चुका है। कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं। सरकार के लिए जरूरी आंकड़ा 115 है। कांग्रेस को चार निर्दलीय, 2 बसपा और एक सपा विधायक का समर्थन है। उसके पास कुल 121 जबकि भाजपा के पास 107 विधायक हैं। 

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