बाल देखभाल संस्थानों का सोशल ऑडिट कराया जाए: जस्टिस लोकुर
-लोहिया विधि विवि में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के 10 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम बच्चों पर केंद्रित और मज़बूत अमल की मांग

लोहिया विधि विवि में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के 10 साल पूरे होने पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी. लोकुर ने बाल देखभाल संस्थानों के सोशल ऑडिट की जरूरत बताई। संस्थानों में भीड़भाड़ और बच्चों की देखभाल से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देने की बात कही। लोहिया विधि विवि के कुलपति प्रो.अमर पाल सिंह ने कहा कि बच्चों को संविधान में मिले सभी अधिकार समान रूप से मिलना जरूरी है। अभियोजन निदेशालय के निदेशक ललित मुद्गल ने किशोर न्याय बोर्ड में सरकारी वकील की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कई किशोर न्याय बोर्ड अभी भी बच्चों के अनुकूल नहीं हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की महानिदेशक (जांच) अनुपमा नीलेकर चंद्रा ने कहा कि बच्चों के अपराध में शामिल होने के कारणों को समझना जरूरी है। दोबारा अपराध करने के कारणों की पहचान से कानून को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकता है। जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना ने बच्चों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने पर जोर दिया। बैठक में संस्थागत देखभाल, कानूनी सुरक्षा, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और पुनर्वास पर चर्चा हुई। इस दौरान यूनिसेफ यूपी के सहयोग से आरएमएलएनएलयू में सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स का भी उद्घाटन किया गया।इस मौके पर आईप्रोबोनो इंडिया, एनफोल्ड ट्रस्ट, इंडिया जस्टिस रिपोर्ट, काउंसिल टू सिक्योर जस्टिस और आशियाना फाउंडेशन की बैठक न्यायविद, वकील, सरकारी अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने कानून को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने और प्रदेश में किशोर न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने पर सभी ने खासा जोर दिया।


