विद्यार्थियों को एआई युग में कानूनी नैतिकता की मिली सीख
पटना लॉ कॉलेज में झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डॉ. एसएन पाठक ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने एआई के युग में कानूनी पेशे की चुनौतियों पर प्रकाश डाला और कहा कि वकील को डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए। विद्यार्थियों को कानूनी पेशे के लिए आवश्यक क्षमताओं के बारे में बताया।

पटना लॉ कॉलेज में मंगलवार को विशेष इंटरैक्टिव सत्र में झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र डॉ. न्यायमूर्ति एसएन पाठक ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पटना लॉ कॉलेज में आना विशेष अनुभूति है। कई वर्षों तक अदालतों में कार्य किया, लेकिन इन सभी भूमिकाओं से पहले मैं इसी संस्थान का विद्यार्थी था।
एआई के युग में कानूनी पेशे की चुनौतियाँ
उन्होंने एआई के युग में कानूनी पेशे की बढ़ती चुनौतियों पर प्रकाश डाला। कहा कि एआई को अपना सहायक बनाइए, लेकिन उसे अपना विवेक कभी मत बनाइए। उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज वीडियो को एआई द्वारा संपादित, डीपफेक या निर्मित किया जा सकता है। इसलिए वकील को यह परखना चाहिए कि उसकी चेन ऑफ कस्टडी और मेटा डाटा क्या है।
कानूनी समस्याओं को समझना
उन्होंने विद्यार्थियों को कहा कि किसी कानूनी समस्या को समझे बिना डेटाबेस पर न जाएं। सबसे पहले तथ्यों, सटीक कानूनी प्रश्न, लागू कानून, सिद्धांत और संभावित राहत को स्पष्ट करें। उन्होंने विद्यार्थियों को कानूनी पेशे के लिए पांच आवश्यक क्षमताएं बताईं जिनमें निर्णय को सही ढंग से पढ़ना, प्रक्रिया का ज्ञान, प्रभावी लेखन, तकनीक के साथ सहजता, सत्यापन की आदत व प्रतिष्ठा का निर्माण शामिल रहा।
भविष्य की कानूनी चुनौतियाँ
उन्होंने विद्यार्थियों को 2035 की एक कल्पित कानूनी चुनौती से अवगत कराया, जहां एआई 98 प्रतिशत सटीकता से परिणाम बताता है, लेकिन न्यायाधीश व्यक्तिगत परिस्थितियों को देख भिन्न निर्णय लेना चाहता है। कहा कि मशीन संवैधानिक शपथ नहीं लेती, न्यायाधीश लेते हैं। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. डॉ. योगेंद्र कुमार वर्मा, डॉ. सुरुचि, रविंद्र कुमार, सौरभ, सतीश कुमार आदि रहे। संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेन्द्र पासवान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रिसर्च स्कॉलर विशाल आनंद ने किया।


