खेत की मेड़ काटने के मामूली विवाद में मार दिया था भाला
मुजफ्फरपुर में खेत की मेड़ काटने के विवाद में किसान रामबहादुर राय की हत्या मामले में 26 वर्ष बाद न्याय मिला। उनके भाई ने एफआईआर दर्ज कराई थी। कोर्ट ने 13 आरोपितों के खिलाफ सुनवाई की, जिसमें 12 को सजा सुनाई गई। परिवार को न्याय मिलने पर खुशी जताई गई।

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। हथौड़ी थाने के झौआ गांव में खेत की मेड़ काटने के विवाद में भाला मारकर किसान रामबहादुर राय (50) की हत्या मामले में उनके भाई जगरनाथ राय ने एफआईआर दर्ज कराई थी। कहा था कि खेत की मेड़ काटे जाने व धान उखाड़ने को लेकर 13 अगस्त 2000 को विवाद हुआ। भाला लगने से रामबहादुर राय की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं, लाठी डंडे, फरसा व गड़ासा से मारपीट में मनोज राय, शिवजी राय व शेरबहादुर राय गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अधिवक्ता सर्वदेव झा ने बताया कि एफआईआर में 11 नामजद किए गए थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान से सात अन्य आरोपितों का नाम मुकदमे में जुड़ा। सेशन ट्रायल के दौरान इसमें से पांच की मौत हो गई। कुल 13 आरोपितों के विरुद्ध सेशन-ट्रायल चला, जिसमें कोर्ट ने 12 को सजा सुनाई।
परिजन बोले-26 वर्ष घुटता रहा परिवार, अब मिला न्याय :
बेंगलुरु में मिठाई का व्यवसाय करने वाले झौआ गांव के अरुण कुमार ने बताया क 26 वर्ष पहले उनके चाचा रामबहादुर राय की नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। इस घटना में तीन अन्य लोग घायल हो गए थे। घटना में शामिल लोग काफी दबंग है। पुलिस की जांच से लेकर कोर्ट की कार्यवाही के दौरान मामले को लटकाने का काफी प्रयास किया गया। मामले की सुनवाई में देरी हो और साक्ष्यों में भटकाव हो, इसके लिए बचाव पक्ष की ओर से लगभग सौ गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया। केस सुलह करने के लिए पांच बीघा जमीन व दस लाख रुपये का प्रलोभन भी दिया गया। इसके बाद भी उनका परिवार नहीं झुका तो धमकी दी गई। उन्हें व उनके परिवार को भगवान व कोर्ट पर पूरा भरोसा था। आज उनके परिवार को न्याय मिला।
सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में भिड़े दोनो पक्ष :
सजा सुनाए जाने को लेकर दोनों पक्षों की ओर से बड़ी संख्या में समर्थक कोर्ट परिसर में पहुंचे थे। इसमें दोषी ठहराए गए पक्ष के समर्थकों की संख्या अधिक थी। सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में दोनों पक्षों के बीच भिड़ंत हो गई। सजा पाने वाले पक्ष के समर्थक मृतक रामबहादुर राय के भतीजा धर्मेंद्र यादव, अरुण कुमार व सूचक जगरनाथ राय के पुत्र विजय राय के साथ मारपीट करने लगे। इससे धर्मेंद्र यादव का सिर फट गया। इसको लेकर परिसर में कुछ देर तक हंगामा हुआ। सूचना पर नगर थानाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह पहुंचे, तब मामला शांत हुआ।


