Hindi NewsIndia NewsJustice Pinaki Chandra Ghose appointed as Lokpal by President of India Ram Nath Kovind
पीसी घोष बने देश के पहले लोकपाल, राष्ट्रपति कोविंद ने लगाई मुहर

पीसी घोष बने देश के पहले लोकपाल, राष्ट्रपति कोविंद ने लगाई मुहर

संक्षेप:

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को मंगलवार को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की पूर्व प्रमुख अर्चना...

Mar 20, 2019 12:15 am ISTएजेंसी नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को मंगलवार को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम को लोकपाल का गैर न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। न्यायमूर्ति दिलीप बी भोंसले, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती और न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी को भ्रष्टाचार निरोधक निकाय का न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। ये नियुक्तियां उस तारीख से प्रभावित होंगी, जिस दिन वे अपने-अपने पद का कार्यभार संभालेंगे।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

न्यायमूर्ति घोष (66) मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वह 29 जून 2017 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य हैं। इन नियुक्तियों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत चयन समिति ने की थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसे मंजूरी दी। चयन समिति में पीएम मोदी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई और प्रख्यात कानूनविद् मुकुल रोहतगी भी शामिल हैं।

लोकपाल और लोकायुक्त कानून के तहत कुछ श्रेणियों के सरकारी सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिये केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान है। यह कानून 2013 में पारित किया गया था। ये नियुक्तियां सात मार्च को उच्चतम न्यायालय के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से 10 दिन के भीतर लोकपाल चयन समिति की बैठक की संभावित तारीख के बारे में सूचित करने को कहने के एक पखवाड़े बाद हुई हैं। न्यायालय के इस आदेश के बाद 15 मार्च को चयन समिति की बैठक हुई थी।

नियमों के अनुसार लोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं। इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिये। इनमें से कम से कम 50 फीसदी सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं होनी चाहिये।

लोकसभा चुनाव 2019: 25 सालों से बीजेपी का गढ़ है गुजरात की अमरेली सीट

लोकपाल के लिए बनाई गई समिति में लोकपाल के लिए 10 नामों का चयन किया गया था, जिसमें जस्टिस घोष का भी नाम शामिल था। मई, 2017 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत होने के बाद जस्टिस घोष ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ज्वॉइन कर लिया था।

भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने लोकपाल नियुक्ति में देरी के विरोध में आंदोलन का एक और दौर शुरू किया था, जिसके बाद लोकपाल के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। उन्होंने अपना आन्दोलन इस वादे के बाद समाप्त किया कि जल्द ही लोकपाल का गठन किया जाएगा।

इस पद के लिए काफी आलोचनाओं के बीच लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आवेदन आमंत्रित किए गए थे। नौ सदस्यीय लोकपाल चयन समिति की पहली बैठक इसके गठन के लगभग चार महीने बाद जनवरी में हुई थी। समिति में भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य, प्रसार भारती के अध्यक्ष ए. सूर्य प्रकाश और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख ए.एस. किरण कुमार सदस्य के रूप में शामिल हैं।

बिहार NDA में सीटों का ऐलान; गिरिराज की मौजूदा सीट LJP के खाते में, तो JDU को मिली भागलपुर सीट

लोकपाल के न्यायिक सदस्य के लिए निर्धारित योग्यताएं
लोकपाल के न्यायिक सदस्य बनने के लिए आवेदक को या सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान या पूर्व प्रधान न्यायाधीश या किसी भी उच्च न्यायालय का वर्तमान या पूर्व मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए। वहीं, गैर-न्यायिक सदस्यों में भ्रष्टाचार रोधी संबंधित क्षेत्र का 25 सालों का अनुभव रखने वाला कोई भी व्यक्ति हो सकता है। 

यह पात्रता लोकपाल अधिनियम के मुताबिक निर्धारित की गई है। चेयरमैन पद का आवेदक कोई निर्वाचित प्रतिनिधि या कोई भी व्यवसाय करने वाला या किसी भी क्षेत्र का पेशेवर नहीं हो सकता है। इसके अलावा उम्मीदवार किसी ट्रस्ट या लाभ के पद पर भी नहीं होना चाहिए। अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा और वेतन भारत के प्रधान न्यायाधीश के बराबर होगा।

लोकपाल अध्यक्ष बनने के बाद किसी अन्य लाभ के पद पर नहीं रह सकते
अध्यक्ष बनने के बाद, उस व्यक्ति को सरकार से किसी भी प्रकार पद (राजनयिक पद समेत) प्राप्त करने की अनुमति नहीं होगी और न ही वह सरकार में किसी लाभ के पद पर नियुक्त हो सकेगा। इसके अलावा अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद पांच साल तक संसद या राज्य विधानसभाओं के चुनाव लड़ने पर रोक रहेगी। इस पद के लिए न्यूनतम आयु मानदंड 45 वर्ष है।

इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।