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पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद चारों ओर धुंआ-धुआं, एक्सपर्ट्स ने बताया आखिर कहां रह गई चूक

सुप्रीम कोर्ट ने बेरियम युक्त पटाखों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया लगाया था, लेकिन उसके हालिया आदेश का दिवाली पर देश भर में उल्लंघन किया गया, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब हो गया।

पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद चारों ओर धुंआ-धुआं, एक्सपर्ट्स ने बताया आखिर कहां रह गई चूक
Niteesh Kumarभाषा,नई दिल्लीTue, 14 Nov 2023 01:14 AM
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न्यायपालिका और वकील वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए पटाखों व पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू नहीं कर सकते हैं। इससे बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करके ही निपटा जा सकता है। यह बात विधि विशेषज्ञों ने कही। शीर्ष अदालत ने बेरियम युक्त पटाखों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया लगाया था, लेकिन उसके हालिया आदेश का दिवाली पर देश भर में उल्लंघन किया गया, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब हो गया। पटाखों की बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह करने वाली वाली याचिका के मुख्य वादी अर्जुन गोपाल और अन्य के वकील गोपाल शंकरनारायणन हैं। उन्होंने अदालत के हालिया आदेश के घोर उल्लंघन के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के खिलाफ एससी में अवमानना याचिका दायर करने का फैसला किया है।

न्यायिक आदेशों के उल्लंघन पर सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में कोई अवमानना काम नहीं करेगी, जहां वायु प्रदूषण में वृद्धि के लिए कई चीजें जिम्मेदार हों। उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक मुद्दा है, जिससे साल भर बड़े पैमाने पर सामाजिक जागरूकता पैदा करके प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। द्विवेदी ने कहा, 'ये सामाजिक मुद्दे हैं। अवमानना की कार्रवाई बहुत कठिन लगती है। वे (उच्चतम न्यायालय) कितने लोगों को और किस-किस को पकड़ेंगे। मूल रूप से यह सामाजिक जागरूकता का मुद्दा है। लोगों को अधिक जागरूक किया जाना चाहिए। मुझे नहीं लगता है कि इसमें अदालतों और वकीलों की कोई ज्यादा भूमिका है।' द्विवेदी ने कहा कि इसमें बहुत सारे अपराधी- निर्माता, विक्रेता, खुदरा विक्रेता, खरीदार हैं और वे भी हैं जो पटाखे फोड़ रहे हैं।

सामाजिक जागरूकता अभियान की जरूरत
वकील और पर्यावरणविद गौरव कुमार बंसल भी द्विवेदी से सहमत दिखे। उन्होंने कहा कि वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान की जरूरत है और सिर्फ उच्चतम न्यायालय के आदेश बढ़ते खतरे पर अंकुश नहीं लगा सकते हैं। बंसल ने कहा कि SC ने पटाखों के मामले में कई आदेश पारित किए हैं, लेकिन इसे लागू करना कार्यपालिका का काम है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेशों के कार्यान्वयन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस अधिकारियों की बड़ी भूमिका है। द्विवेदी ने इस बात को रेखांकित किया कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति की जरूरत है, क्योंकि सिर्फ पटाखे फोड़ना प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारक नहीं है। उन्होंने कहा, 'वोट की खातिर आप किसानों को पराली जलाने से नहीं रोक पा रहे हैं। आप उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते। ऐसा हर साल होता है। इसलिए यह बहुत मुश्किल है, यह सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति का मुद्दा नहीं है। प्रश्न विकल्प ढूंढने का भी है।'

वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रमुख कारक
सीनियर वकील ने बताया कि वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक है। उन्होंने कहा, 'पटाखे प्रदूषण का एकमात्र स्रोत नहीं हैं। वाहनों, खासकर कारों की संख्या और उनसे निकलने वाले धुएं पर गौर करें। एक-एक घर में चार-पांच कारें हैं। कारों की संख्या इस तरह बढ़ती जा रही है कि लोग उन्हें अपने घरों के अंदर खड़ा नहीं कर पा रहे हैं, बल्कि सड़कों पर खड़ा कर रहे हैं। सड़कें जाम हैं। इस बढ़ते प्रदूषण में कई कारक योगदान देते हैं।' वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणाभ चौधरी ने कहा, 'साल के इस समय में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर बढ़ने के कई कारण हैं, जिनमें पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, पटाखे फोड़ना आदि शामिल हैं। चूंकि सरकारें प्रदूषण को नियंत्रित करने में विफल रही हैं- यह सभी सरकारों के लिए है। मैं किसी विशेष सरकार को दोष नहीं दे रहा हूं। नागरिकों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और जब शीर्ष अदालत के आदेशों का उल्लंघन होता है, तो एक नागरिक के तौर पर मुझे दुख होता है।'

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