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28 अक्तूबर, 2020|8:28|IST

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सुप्रीम कोर्ट के जज सीकरी बोले-सोशल मीडिया से न्यायिक प्रक्रिया दबाव में

Judging is ‘under stress’ in digital era: Justice A K Sikri. (Photo by Vipin Kumar/ Hindustan Times)

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए.के.सीकरी ने रविवार को कहा कि डिजिटल युग में न्यायिक प्रक्रिया दबाव में है। किसी मामले पर सुनवाई शुरू होने से पहले ही लोग सोशल मीडिया पर संभावित फैसले पर बहस करने लग जाते हैं। मेरा तजुर्बा है कि इसका जज पर प्रभाव पड़ता है।

जस्टिस सीकरी ने ‘लॉएशिया’ के कार्यक्रम में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इसका ज्यादा असर नहीं है,क्योंकि जब तक जज यहां पहुंचते हैं वे काफी परिपक्व हो जाते हैं । वे जानते हैं कि मीडिया में चाहे जो भी हो रहा है उन्हें कानून के आधार पर मामले का फैसला कैसे करना है।

राव की नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से अलग हुए जस्टिस सीकरी

उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले यह धारणा थी कि चाहे सुप्रीम कोर्ट हो, हाईकोर्ट हों या कोई निचली अदालत, एक बार अदालत ने फैसला सुना दिया, तो आपको फैसले की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। अब जो जज फैसला सुनाते हैं, उनको भी बदनाम किया जाता है या  मानहानिकारक भाषण दिया जाता है।   कार्यक्रम में मौजूदा अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल माध्वी गोरदिया दीवान ने जस्टिस सीकरी से सहमति जताते हुए कहा कि टिवटर के दौर में वकीलों का कार्यकर्ता बनना भी एक बड़ी चुनौती है। 

मानवाधिकार के लिए चुनौती 
जस्टिस सीकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पहरेदार बन गया है। यह मानवाधिकार के लिए भी चुनौती बन गया है, क्योंकि इसके जरिये व्यक्तिगत और सार्वजनिक रूप से निगरानी किए जाने का खतरा है। अगर यह व्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता को प्रभावित करता है, तब यह खतरनाक हथियार बन जाता है।  

यह पेड और फर्जी खबर का दौर 
जस्टिस सीकरी ने कहा कि मीडिया डिजिटल युग में परिवर्तित हो चुका है। अब दौर पेड न्यूज और फर्जी खबर का है। कहानी बनाई जाती है और कोई उसे डिजिटल माध्यम पर प्रसारित कर देता है। कुछ घंटो में ही वह खबर वायरल होकर करोड़ों लोगों तक पहुंच जाती है। यह चिंताजनक स्थिति है। 

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  • Web Title:Judging is under stress in digital era Justice A K Sikri