DA Image
29 अक्तूबर, 2020|12:40|IST

अगली स्टोरी

जेपी नड्डा बोले- सुशासन पर नीतीश कुमार की लोकप्रियता बरकरार, बिहार में फिर बनाएंगे सरकार, पढ़ें EXCLUSIVE इंटरव्यू

jp nadda exclusive interview on bihar assembly election nitish kumar vidhan sabha chunav ljp jdu bjp

बिहार के विधानसभा चुनाव का प्रचार चरम पर है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा पूरी मुस्तैदी के साथ पार्टी के साथ गठबंधन की भी कमान संभाले हुए हैं। नड्डा का मानना है कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता बरकरार है और सुशासन को लेकर लोगों का भरोसा उन पर कायम है। नड्डा ने रोजगार के मुद्दे पर छिड़ी जंग में विपक्ष के वादों को खोखला करार देते हुए आरोप लगाया कि दस लाख लोग राजद के समय बिहार छोड़ कर गए।

हिन्दुस्तान के विशेष संवाददाता रामनारायण श्रीवास्तव के साथ चर्चा में नड्डा ने राजद पर आरोप लगाया कि उसकी नीति, नीयत और कार्यशैली कुछ नहीं बदली है। उनका साफ कहना है कि लोजपा बिहार में सहयोगी नहीं है। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :

सवाल : बिहार में पिछला चुनाव नीतीश के खिलाफ लड़ा था। अब साथ में हैं। क्या इससे विश्वसनीयता प्रभावित नहीं होती है?

जबाब : नीतीश की लोकप्रियता जो 2010 में थी वह बरकरार है। उनकी प्रशासनिक क्षमता से बिहार में विकास हुआ है। नीतीश को सबसे ज्यादा दिक्कत संप्रग के शासन के समय में विकास कार्यों में आई। दूसरी तब जब वे लालू के साथ गए। इसलिए जीतने के बाद भी सुशासन के कारण उनको छोड़ा। और अब जब वे भाजपा के साथ आए हैं तो विकास की गति बढ़ी। शिक्षा, स्वास्थ्य, ढांचागत क्षेत्र, यह तीनों ही भाजपा के पास रहे और नीतीश बाबू ने पूरा सहयोग किया।

सवाल : बिहार में किस तरह के माहौल को देख रहे हैं?

जबाब : नब्बे दशक से दो हजार की शुरू तक यानी साल 1985 से 2000 तक लगभग 15 साल का जो कालखंड रहा वह बिहार को कई मायनों में रेगिस्तान की तरह बदलने वाला रहा। पलायन हो रहा था, लोग छोड़कर जा रहे थे। कानून व्यवस्था ध्वस्त थी, सरकार संरक्षित गुंडाराज था, अराजकता थी। तो वहां से निकलकर नीतीश बाबू या सुशासन बाबू जो लोगों ने नाम दिया, वहां से वह आगे बढ़े? उस समय विभिन्न क्षेत्रों में मानक बहुत नीचे चले गए थे, उनको ऊपर लाना बहुत बड़ा काम था। यह सारा काम नीतीश कुमार ने किया।

सवाल : भाजपा काडर में अपने नेतृत्व को लेकर बात सामने आती रही है। क्या भाजपा व जद (यू) में पूरी तरह समन्वय है?

जबाब : हमने एक समय में खुद ही नीतीश कुमार को नेता बनाया है। हमने उनको मुख्यमंत्री बनाया है। हम उनको साथ लेकर चलेंगे। यह भी साफ कर दूं कि नीतीश हमारे नेता रहेंगे और उनके नेतृत्व में सरकार गठन करेंगे। इसमें किसी को कई संदेह नहीं होना चाहिए। हमें पता है कि बड़े उद्देश्य के लिए पार्टी काडर को कैसे समझाना है और कैसे समन्वय रखना है।

सवाल : क्या अब किसी तरह की नाराजगी नहीं है?

जबाब : हम लोग राजनीतिक रूप से बहुत सारी बातों पर समझदारी रखते हैं। उनको (जद यू) भी ध्यान में आया है कि उन्होंने उनके साथ (राजद के साथ ) सरकार बनाई उसमें सुशासन संभव नहीं है। वो समझ गए कि राजद का चरित्र बदला नहीं है। उनका वही अराजकता का चरित्र है। अराजकता के साथ वे चल नहीं सकते हैं। ऐसे में उनका सर्वश्रेष्ठ सहयोगी भाजपा ही होगी।

सवाल : क्या आपको लगता है कि नीतीश के लगातार मुख्यमंत्री रहने से कुछ सत्ता विरोधी माहौल भी है? नीतीश की भाषा को लेकर भी सवाल उठे हैं।

जबाब : सत्ता विरोधी माहौल नहीं है। आप इसलिए सोच रहे हैं क्योंकि आप उसको 2015 से जोड़ रहे हैं। आप उसको 2010 से जोड़े, परिणाम वही मिलेगा। उनकी लोकप्रियता पहले भी थी, वह बरकरार है। नीतीश का व्यक्तित्व सुशासन का प्रतीक है। चुनाव में उनके अपने तरीके हैं। बयान नहीं, असली मुद्दा सुशासन ही है।

सवाल : लोजपा को लेकर अभी भी उहापोह है क्या ?

जबाब : स्पष्ट बात है कि बिहार के चुनाव में लोजपा हमारी सहयोगी नहीं है और हम उसी तरीके से लड़ रहे हैं। खुद को मोदी जी का हनुमान कहें और नीतीश का विरोध करें, यह नहीं हो सकता है।

सवाल : क्या केंद्र सरकार में लोजपा को जगह मिलेगी?

जबाब : केंद्र की जब चर्चा होगी, तब देखा जाएगा। लेकिन ऐसा होता रहा है कि लोग केंद्र में अलग गठबंधन में और राज्य में अलग गठबंधन में चलते रहे हैं। कोई भ्रम नहीं है। रामविलास पासवान हमारे नेता रहे। अभी बिहार का चुनाव है और वहां पर लोजपा हमारा सहयोगी नहीं है।

सवाल : रोजगार बिहार में बड़ा मुद्दा हो गया है? तेजस्वी के वादे से कैसे निपटेंगे?

जबाब : तेजस्वी की समझ सीमित है। उनको शासन की समझ नहीं है। इसलिए इस तरह के स्लोगन दे रहे हैं। रोजगार को समग्रता में देखा जाता है, केवल रिक्तियों में नहीं। आप दस लाख नौकरी देने की बात करते हैं। मैं आरोप लगाता हूं कि दस लाख लोग तो आपके कारण बिहार छोड़कर गए हैं। हमारे वादे यथार्थ के हैं। हमने कहा कि हम 19 लाख नौकरियों के अवसर देंगे। और जो जगह खाली हैं उनको हम भरेंगे। वो साढ़े चार लाख के आसपास हैं।

सवाल : नीतीश को इस बार नए चेहरे तेजस्वी से चुनौती मिल रही है। आप इसे कैसे देखते हैं?

जबाब : तेजस्वी को किसने नहीं परखा है। पिछले साल बजट सत्र में एक भी दिन सदन में नहीं आए हैं। कुछ नहीं बदला है। वही सोच, मानसिकता और चरित्र है। नीयत में कोई बदलाव नहीं है और नीति में कोई परिवर्तन नहीं है। इसलिए आगे कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

सवाल : विपक्षी महागठबंधन को कैसे देखते हैं?

जबाब : कांग्रेस व वामदलों के साथ गठबंधन बहुत खतरनाक है। यह जमीन से जुड़े ही नहीं है। जमीन की समझ ही नहीं है। कमरे में बैठकर स्लोगन तय करते हैं। इनको बताने वाले वो लोग होते हैं जो मास्टर स्ट्रेटेजियन कहलाते हैं। इनको कुछ पता तो होता नहीं है। जमीन की लड़ाई कुछ और होती है। मुझे जमीन से समझने का मौका मिला है।

सवाल : राजग छोटा हो रहा है, क्या वजह है कि सहयोगी छोड़ कर जा रहे हैं?

जबाब : हर एक के अलग-अलग कारण होते हैं। महाराष्ट्र की बात कीजिए, वह तो धोखा है। पंजाब की बात करें तो प्रधानमंत्री और हम सब किसानों और लोगों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। कैबिनेट के निर्णय में भी हम साथ रहे। प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल व हरसिमरत कौर तीनों ने इसके पक्ष में बयान दिया। बाद में कांग्रेस के दबाब में आ गए। बिहार की बात है तो चिराग हमारे पास आए थे, बात हुई थी। अब हर एक की अपनी महत्वाकांक्षाएं होती हैं अपनी पार्टी की चिंता होती है। उसे लेकर वे चले गए। हमने उनको समन्वित करने की कोशिश की। 121 में ही समन्वित करना था। भाजपा का अपना रंग, चरित्र, संस्कृति रहे इसकी चिंता तो हमें करनी होगी।

सवाल : भाजपा में अमित शाह के बाद आपने कमान संभाली है। ऐसे में तुलना स्वाभाविक है। कुछ नया बदलाव करेंगे?

जबाब : पहली बात कप्तान बदलने से बल्लेबाज का क्रम नहीं बदलता है। हरेक का अपना अपना क्रम है। जब वह अध्यक्ष थे, उन्होंने हर फैसले में मुझे शामिल रखा। आज भी हम एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं। फैसले में सभी संसदीय बोर्ड के सदस्य शामिल रहते हैं। इसमें कप्तान बदल सकते हैं। कार्यशैली नहीं।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:JP Nadda Exclusive Interview on Bihar Assembly Election Nitish Kumar Vidhan Sabha Chunav LJP JDU BJP