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पत्रकार रामचंद्र ने प्रकाशित किया था राम रहीम का घिनौना सच, किया था साध्वियों के यौन शोषण का खुलासा

गुरमीत राम रहीम

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में 16 साल बाद फैसला आया है। साल 2002 से मामले की कोर्ट मे सुनवाई चल रही थी। अब जाकर छत्रपति के परिजनों का लंबा इंतजार खत्म हुआ है।

इस मुकदमे को लड़ने में रामचंद्र के बेटों काफी धैर्य रखकर संघर्ष किया। उन पर कई बार दबाव बनाने की कोशिश की गई, पर वे नहीं झुके। 
गुरमीत राम रहीम को शुक्रवार को सीबीआई अदालत के जज जगदीप सिंह ने दोषी करार दिया। ये वही जज हैं जिन्होंने ही साध्वी यौन शोषण मामले में भी राम रहीम को सजा सुनाई थी। 

रामचंद्र ने अपने अखबार में छापा था साध्वियों का खत

डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा साल 2002 में एक पत्र सामने आया था, जिसमें साध्वियों ने अपने साथ हो रहे यौन शोषण का खुलासा करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में मदद की गुहार लगाई थी। उन दिनों पत्रकार रामचंद्र छत्रपति अखबार ‘पूरा सच’ प्रकाशित करते थे। साध्वी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोगों के बीच चर्चा का विषय बना, तो छत्रपति ने साहस दिखाया और 30 मई को अपने अखबार में 'धर्म के नाम पर किया जा रहा साध्वियों का जीवन बर्बाद’ शीर्षक से खबर छाप दी।

रामचंद्र को मिलने लगी थी धमकियां

इस खबर से तहलका मच गया क्योंकि अब अखबार द्वारा खुलकर लोगों को इस बात की जानकारी हुई कि डेरे में साध्वियों के साथ यौन शोषण किया जा रहा है। इसके बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को लगातार राम रहीम द्वारा धमकियां भी दी जाने लगी। इस बारे में छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति बताते हैं कि पिता लगातार मिल रही धमकियों से नहीं डरे और इस मामले को आगे भी लगातार प्रकाशित करते रहे।

24 अक्तूबर 2002 को रामचंद्र की हत्या

24 अक्तूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति अपने घर पर अकेले थे कि तभी कुलदीप और निर्मल सिंह ने उन्हें आवाज देकर घर के बाहर बुला लिया। कुलदीप ने छत्रपति पर पांच फायर किए और दोनों मौके से फरार हो गए। हालांकि पुलिस ने उसी दिन कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया था। पत्रकार छत्रपति को पहले रोहतक पीजीआई में भर्ती करवाया गया था। बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली अपोलो में ले जाया गया था। लेकिन 28 दिनों बाद 21 नवंबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने दम तोड़ दिया। बाद में जांच में सामने आया कि जिस रिवॉल्वर से फायर की गई थी, वह डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर कृष्ण लाल की थी। इस मामले में तत्कालीन चौटाला सरकार ने जांच के आदेश दिए।

सीबीआई जांच के आदेश

इस दौरान दूसरे आरोपी निर्मल सिंह ने पंजाब में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने सिरसा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर ट्रायल शुरू करवा दिया। इस मामले में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कई सुनवाई के बाद 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने सिरसा कोर्ट के ट्रायल को रुकवा दिया और सीबीआई को जांच के आदेश दिए।

राम रहीम पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट 

सीबीआई जांच के दौरान राम रहीम ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर केस में स्टे लगवा ली। मामले में एक साल तक स्टे लगा रहा। बेटे अंशुल छत्रपति ने भी हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। जिसके बाद नवंबर 2004 में स्टे हटा। सीबीआई ने 31 जुलाई 2007 में सीबीआई ने चार्जशीट पेश की।

बयानों से पलट गया अहम गवाह

2014 में कोर्ट में सबूतों को लेकर बहस शुरू हुई। 2007 में पेश किए गए चालान में खट्टा सिंह अहम गवाह थे, लेकिन वह अपने बयानों से पलट गया। अगस्त 2017 में जब साध्वी यौन शोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को सजा हुई, तो खट्टा सिंह ने दोबारा अपनी गवाही देने के लिए अपील की और उनकी गवाही हुई।

16 साल बाद फैसला

दो जनवरी 2019 को इस मामले की आखिरकार सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने राम रहीम समेत कुलदीप, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को 11 जनवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए आदेश दिए। 

बेटे अंशुल ने लंबी लड़ाई लड़ी

अपने पैतृक गांव दडबी में खेती किसानी करने वाला अंशुल अपनी मां कुलवंत कौर,छोटे भाई अरिदमन और बहन क्रांति और श्रेयसी के साथ अपने पिता को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ते रहे। अंशुल ने बताया कि हमने एक ताकतवर दुश्मन के साथ इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी। इस मामले में सीबीआई की ओर से 46 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। बचाव पक्ष की ओर 21 गवाही पेश किए गए थे। हत्या के चश्मदीद रामचंद्र के बेटे अंशुल और अदिरमन थे। जिन्होंने कोर्ट में आंखों देखी बयां की थी। इसके अलावा हत्या के षड्यंत्र के बारे में गवाह खट्टा सिंह ने कोर्ट में बयान दिए थे। साथ ही डॉक्टरों की भी गवाहियां हुई थी। बचाव पक्ष की दलीलें थी कि राम रहीम का पहली बार 2007 में केस में सामने आया था। साथ ही किसी भी आरोपित की पहचान नहीं हुई थी। मामले की जांच डीएसपी सतीश डागर और डीआइजी एम नारायणन ने की थी।

राम रहीम को मृत्युदंड मिलना चाहिए : अंशुल छत्रपति

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के लिए मृत्युदंड की मांग की। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के करीबी सहयोगियों ने हत्या कर दी थी। पंचकूला स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम व तीन अन्य को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या मामले में दोषी करार दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने मीडिया से कहा, ‘इस तरह का व्यक्ति हमारे समाज में रहने लायक नहीं है।

हमारी मांग है कि उसे (गुरमीत राम रहीम) मौत की सजा दी जाए।’ अंशुल ने कहा, ‘बीते 16-17 सालों से उम्मीद लगाए हैं कि हमे न्याय मिलेगा। हमें लंबे समय तक जूझने के बाद आज न्याय मिला है।’ अंशुल ने कहा, ‘हमें बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है और बहुत कष्ट उठाने पड़े हैं, क्योंकि वह (गुरमीत राम रहीम) बहुत ज्यादा शक्तिशाली था। हम सीबीआई टीम का आभार जताते हैं कि उसने मामले की जांच की और हमारा समर्थन किया। इस व्यक्ति को मौत की सजा मिलनी चाहिए।’ सीबीआई अदालत 17 जनवरी को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मामले में सजा का ऐलान करेगी।

कई बार समझौते का दबाव बनाया

अंशुल छत्रपति बताते हैं कि दोनों भाइयों ने आखिरी दम तक केस लड़ने की ठान रखी थी। कई लोग हमारा साथ दे रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कभी हमारे रिश्तेदारों के माध्यम से तो कभी जानने वालों के माध्यम से समझौता के दबाव बनाया गया। एक बार पंजाब के एक पूर्व मंत्री ने उन्हें समझौते का ऑफर किया। तो उनके पापा के दोस्त एक सरपंच को हरियाणा के एक पूर्व सीएम ने समझौते का दबाव बनाया। लेकिन वे कभी नहीं झुके। अंशुल बताते हैं कि पापा की मौत के बाद काफी उतार चढ़ाव आए। हमने खुद का पेट काटकर अखबार काफी दिन तक चलाया। भाई-बहन और अपनी शादी की। इस बीच वे कर्जदार भी हो गए थे। आर्थिक उतार-चढ़ाव भी आए लेकिन पुस्तैनी जमीन ने बचाए रखा। तभी यह लड़ाई लड़ सके।

घटनाक्रम

- 2002 में 30 मई को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति द्वारा ‘पूरा सच’ में धर्म के नाम पर किया जा रहा है साध्वियों का जीवन बर्बाद समाचार प्रकाशित किया गया।
- 2002 में ही 4, 7 और 27 जून को डेरा सच्चा सौदा से जुड़े बड़े समाचार प्रकाशित किए। 
-2002 में 2 जुलाई को एसपी सिरसा को डेरे की धमकियों से अवगत करवाया और सुरक्षा की मांग रखी। 
- 2002 अक्तूबर में डेरा के प्रबंधक कृष्ण लाल पूरा सच कार्यालय पहुंचे और यहां उन्होंने डेरे के विरूद्ध खबर लिखने के मामले को बंद करने को कहा।
2002 24 अक्तूबर को डेरा में कारपेंटर का काम करने वाले दो युवकों ने रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मारी। एक पकड़ लिया गया। शहर थाना में केस दर्ज। 
- 2002 में 24 अक्तूबर को  एसआई ने बयान दर्ज किए, लेकिन डेरा प्रमुख का नाम नहीं लिखा। 
- 2002 में 29 अक्तूबर को कृष्ण लाल ने सीजेएम फिरोजपुर की कोर्ट में सरेंडर किया। 
- 2002 में 8 नवंबर को पीजीआइ रोहतक से छत्रपति को दिल्ली के अपोलो भेज दिया गया। 
- 2002 में 21 नवंबर को रामचंद्र छत्रपति का देहांत हो गया। 
-  2002 5 दिसंबर को सिरसा पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में दायर की चार्जशीट, डेराप्रमुख का नाम नहीं था। 
- 2003 : अंशुल छत्रपति ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की। 
- 2003 10 नवंबर सीबीआई को केस ट्रांसफर हुआ। 
-  2003 में 9 दिसंबर को सीबीआई ने जांच शुरू की, सीबीआई ने शहर थाना में एक केस और दर्ज किया, जिसमें डेरा प्रमुख का नाम भी शामिल किया। 
- 30 जुलाई 2007 को सीबीआई ने पेश किया चालान।

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  • Web Title:Journalist Ramchandra had published shameful truth of Ram Rahim had revealed sexual abuse of sadhvis in dera sachha sauda