Jharkhand Women Lead in employment against Men - सफलता : रोजगार पाने में पुरुषों से आगे हैं महिलाएं DA Image

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सफलता : रोजगार पाने में पुरुषों से आगे हैं महिलाएं

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सिमडेगा की रहने वाली सुषमा हर शनिवार को अपने बीमार मां-बाप को देखने रांची से अपने गांव चली जाती है। रांची की गारमेंट फैक्ट्री में करने वाली यह महिला अपने परिवार की एकमात्र कमाऊ सदस्य है। मैट्रिक और इंटर तक पढ़े दो भाइयों को अभी भी नौकरी देने वालों का इंतजार है। यह सिर्फ झारखंड के एक घर की कहानी नहीं है। प्रदेश के हर कोने में महिलाओं ने रोजगार के मोर्चे पर पुरुषों को पछाड़ दिया है।

भारत सरकार की ओर से हाल ही में जारी श्रमबल सर्वेक्षण 2017-18 के आंकड़े भी झारखंड की महिलाओं की बेरोजगारी पर कामयाबी की कहानी कहते हैं। नौकरी से मासिक वेतन पाने वालों में भी पुरुषों से अधिक महिलाओं की भागीदारी है। झारखंड के शहरों में 46.9 फीसदी महिलाएं नौकरीशुदा हैं। पुरुष इससे एक कदम पीछे अटक गए हैं। पुरुषों के नौकरी पाने का आंकड़ा 45.9 फीसदी है। राज्य में एक भी निरक्षर महिला बेरोजगार नहीं है। जबकि आज भी काम करने वाली उम्र के गांवों में 2.8 फीसदी और शहरों में 2.2 फीसदी रोजगार के लिए भटक रहे हैं।

राज्य में पुरुषों की बेरोजगारी दर महिलाओं से ज्यादा
बेरोजगारी पर काबू पाने में प्रदेश के पुरुष महिलाओं की तरह भाग्यशाली नहीं हैं। राज्य के पुरुषों में 8.2 फीसदी बेरोजगार हैं। महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.2 फीसदी है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की श्रम भागीदारी की यह बेहतरी प्रदेश की अर्थव्यवस्था के हर कोने में दिखाई दे रही है। उद्योग, खनन और वानिकी से जुड़े अकुशल कामों में भी महिलाओं को हाल के दिनों में काफी रोजगार मिला है। इसके अलावा 60 हजार सखी मंडलों और दीदी समूहों जैसे स्व सहायता कार्यक्रमों से भी  महिलाएं बड़ी संख्या में स्वरोजगार हासिल करने में कामयाब हुई हैं।

आंकड़ों पर नजर

शहरों में नौकरी:  महिला 46.9%, पुरुष 45.9%
निरक्षरों में बेरोजगारी: ग्रामीण -पुरुष 2.8%,  महिला 0%.... शहरी - पुरुष 2.2%, महिला 0%

ये है खास
7.7 फीसदी है बेरोजगारी दर
8.2 फीसदी पुरुष हैं बेरोजगार

02 लाख महिलाओं को सखी मंडलों में मिला रोजगार
25 हजार महिलाओं का कराया गया कौशल विकास

भारत सरकार के श्रमबल सर्वेक्षण के आंकड़े देते हैं गवाही
निरक्षर महिलाएं तो गांव व  शहर दोनों में नहीं हैं बेरोजगार

60 हजार सखी मंडलों के जरिए महिलाओं ने स्वरोजगार के मोर्च पर भी मारी है बाजी 

विशेषज्ञ की राय
झारखंड में महिलाओं की श्रम भागीदारी अच्छी है। उद्योग, खनन और जंगल से जुड़े अकुशल श्रमिकों वाले कामों में निरक्षक महिलाओं को आसानी से काम मिल जाता है। इसलिए निरक्षर महिलाओं के पास काम के अवसरों की कमी नहीं रहती है। निरक्षर पुरुष महिलाएं से थोड़े अधिक पगार वाला काम चाहते हैं। इसलिए उनके पास थोड़े कम अवसर होते हैं। (हरीश्वर दयाल, अर्थशास्त्री)

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