कक्षा 6 से 8 के हो जनजाति बच्चे अपनी भाषा की पुस्तक पढ़ेंगे
झारखंड में कक्षा 6 से 8 तक की जनजाति भाषा में पढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। अगले सत्र 2027-28 से पाठ्यक्रम निर्माण कार्यशाला चल रही है, जिसमें झारखंड की पांच भाषाओं की पुस्तकें प्रकाशित की जाएंगी। छात्रों को पाठ्यक्रम आधारित परीक्षा भी देनी होगी।

चाईबासा। झारखंड शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रांची में कक्षा 6 से 8 तक जनजाति भाषा में पढ़ाई हेतु तैयारी आरंभ कर दी गई है। अगले सत्र 2027-28 से जनजाति भाषा से पढ़ाई करने का लक्ष्य लेकर पाठ्यक्रम निर्माण कार्यशाला जारी है। इसमें मुख्यतः झारखंड की पांच भाषाएं संताली,कुड़ुख, मुंडारी,हो और खड़िया की पुस्तकें प्रकाशित करने की रुपरेखा राष्ट्रीय पाठ्यक्रम प्रारुप के आधार पर कवायद तेज हो गई है। पाठ्यक्रम निर्माण हेतु जेसीइआरटी के निदेशक डॉ.शशि रंजन द्वारा प्रत्येक जनजाति भाषा विषय के लिए 10-10 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति हुई है।
पाठ्यक्रम निर्माण की प्रक्रिया
हो भाषा का पाठ्यक्रम निर्माण के लिए पश्चिमी सिंहभूम के हो भाषी शिक्षक-शिक्षिकाओं कृष्णा देवगम,जगदीश सावैयां, दमयंती बिरुवा,मंगल सिंह मुंडा,लिंडावेंश बिरुवा,निलिमा लेयांगी, रेणु पाट पिंगुवा,रेणु सुंडी ममता पूर्ति की प्रतिनियुक्ति हुई है।
छात्रों के लिए नया अवसर
ज्ञात हो कि 6 से 8 कक्षा के जनजाति बच्चे विशेष कर 8 वीं के विद्यार्थी अब तक बिना सरकारी पुस्तक के जनजाति भाषा विषय लेकर बोर्ड परीक्षा में शामिल होते आए हैं। अब अगले सत्र से विद्यार्थी पाठ्यक्रम आधारित परीक्षा दे पाएंगे। हो भाषा के साहित्यकार व रांची विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ.दमयंती सिंकू देवगम ने मंगलवार को पाठ्यक्रम निर्माण को आयोजित कार्यशाला में शामिल शिक्षक-शिक्षिकाओं से मिलकर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने एनसीएफ आधारित पुस्तक निर्माण के दौरान अपनी सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार आदर्श थीम रखने के तरीके सुझाया.


