झारखंड में बढ़ा आम का उत्पादन, लंदन और दुबई तक पहुंची आम्रपाली की खुशबू

हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड में आम की पैदावार में पिछले पांच वर्षों में 62 हजार टन की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020-21 में 5 लाख टन उत्पादन से 2024-25 में 5.62 लाख टन तक बढ़ा। आम्रपाली समेत विभिन्न किस्मों की मांग बढ़ी है, लेकिन किसानों को बाजार और खाद्य प्रसंस्करण की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

 झारखंड में बढ़ा आम का उत्पादन, लंदन और दुबई तक पहुंची आम्रपाली की खुशबू

रांची, संवाददाता। झारखंड में आम की पैदावार तेजी से बढ़ी है। कृषि विभाग और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य में आम के उत्पादन में 62 हजार टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसान अब बड़ी संख्या में आम की बागवानी से जुड़ रहे हैं। वर्ष 2020-21 में जहां राज्य में लगभग 5 लाख टन आम का उत्पादन हुआ था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 5.62 लाख टन से अधिक हो गया है। पिछले पांच वर्षों में आम की पैदावार में कुल 12.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसके पीछे राज्य का अनुकूल मौसम और यहां की मिट्टी को मुख्य वजह माना जा रहा है। शुष्क जलवायु और लैटेराइट मिट्टी बन रही वरदान

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की राय

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. संयत मिश्र के अनुसार, झारखंड की शुष्क जलवायु आम के उत्पादन में काफी सहायक है। सर्दियों के मौसम के कारण पेड़ों में समय पर मंजर आने लगते हैं। आमतौर पर बारिश की वजह से आम के फूल (मंजर) झड़ने लगते हैं, लेकिन यहां का शुष्क मौसम इन्हें सुरक्षित रखता है। इस मौसम में फल आसानी से पकते हैं और उनकी मिठास तथा गुणवत्ता भी बनी रहती है। इसके अलावा, राज्य में पाई जाने वाली लैटेराइट मिट्टी में आयरन और चूने की मात्रा अधिक होती है, जो फलों को एक आकर्षक और चमकीला लाल रंग देती है। यह मिट्टी पानी को रोकती नहीं है, जो आम के पौधों के बेहतर विकास और अच्छी पैदावार के लिए बेहद जरूरी है।

सिमडेगा का आम अब ग्लोबल

राज्य में आम की विभिन्न किस्मों में आम्रपाली की मांग सबसे अधिक है। स्वाद के मामले में इसने कई किस्मों को पीछे छोड़ दिया है। इसकी मांग विदेशों तक पहुंच चुकी है। सिमडेगा के आम्रपाली की खुशबू लंदन तथा दुबई के बाजारों में महक रही है। राज्य में आम्रपाली के अलावा लंगड़ा, हिमसागर, दशहरी, चौसा, केसर, सुवर्णरेखा और बंबईया जैसी उत्कृष्ट किस्मों की भी व्यावसायिक खेती की जा रही है।

बिरसा हरित ग्राम योजना'से बदली बंजर जमीन की सूरत

आम की पैदावार बढ़ने की मुख्य वजह केंद्र और राज्य सरकार के प्रयास हैं। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत किसानों को बड़ी संख्या में बागवानी से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेकार पड़ी बंजर जमीन को फलदार बगीचों में बदला जा रहा है, जिससे किसानों की आजीविका सुरक्षित हो रही है और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है।

पैदावार तो बढ़ी, पर बाजार और फूड प्रोसेसिंग यूनिट का अभाव

सरकार की पहलों से आम के उत्पादन में तो रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, लेकिन किसानों के सामने सही बाजार न होने की बड़ी समस्या है। बाजार के अभाव में किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है और वे स्थानीय व्यापारियों तथा बिचौलियों को कम दामों पर आम बेचने को मजबूर हैं। यही आम जब खुले बाजार में आते हैं, तो इनकी कीमतें दोगुनी हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में फूड प्रोसेसिंग यूनिट (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) न होने से भी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि यहां ऐसे उद्योग स्थापित हों, तो किसान आसानी से अपने कच्चे और पके हुए माल को उचित दामों पर बेच सकेंगे। किसानों ने सरकार से मांग की है कि बागवानी को बढ़ावा देने के साथ-साथ बाजार भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी आजीविका सुधर सके।

पांच वर्षों के आंकड़े लाख टन में

2020-21 5

2021-22 5.10

2022-23 5.22

2023-24 5.28

2024-25 5.62

सामान्य प्रश्न

झारखंड में आम की पैदावार में कितनी वृद्धि हुई है?
पिछले पांच वर्षों में झारखंड में आम की पैदावार में 62 हजार टन की वृद्धि हुई है।
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