बागुन ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छेड़ा था आदोलन
सोमवार को झारखंड आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय बागुन सुम्बरुई की 8वीं पुण्यतिथि आदिवासी हो समाज कल्याण समिति भवन में मनाई गई। वक्ताओं ने उनके योगदान को याद किया, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष और डायन प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई। सुम्बरुई ने अलग झारखंड राज्य आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आदिवासी हो समाज कल्याण समिति भवन (जोन नंबर-2, बिरसानगर) में सोमवार को झारखंड आंदोलन के प्रणेता व पूर्व सांसद स्वर्गीय बागुन सुम्बरुई की 8वीं पुण्यतिथि मनाई गई। समाज के कई गणमान्य लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान ग्राम मुंडा के रूप में अपने सफर की शुरुआत करने वाले सुम्बरुई ने वर्ष 1945 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ा था, जिसके तहत उन्होंने वन विभाग को मालगुजारी देने से साफ मना कर दिया था। उन्होंने समाज में व्याप्त डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी पुरजोर आवाज उठाई थी। वर्ष 1967 में झारखंड पार्टी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले सुम्बरुई ने जयपाल सिंह मुंडा के साथ मिलकर अलग झारखंड राज्य आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
वह अपने जीवनकाल में चार बार विधायक और पांच बार (छठी, सातवीं, आठवीं, नौवीं और चौदहवीं लोकसभा) पश्चिम सिंहभूम सीट से सांसद चुने गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में हो समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष ज्ञान सिंह बंदिया, संतोष पूर्ति, परगना बारी, संजीव बोदरा, दीपक बिरुली, राजन सामड, नरसिंह बिरुली, संयुक्ता बारी, सुजाता सिंह कुंटिया, ललिता कुंकल, समेत कई लोगों का अहम योदगान रहा।


